परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया, सभी पहलुओं पर आयोग करता है विचार -अर्जुन मुंडा
kharsawan
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि परिसीमन एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत होने वाली प्रक्रिया है और इसके लिए गठित परिसीमन आयोग सभी आवश्यक पहलुओं का अध्ययन कर निर्णय लेता है। रविवार को खरसावां में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि परिसीमन का कार्य लगभग 30 वर्षों में एक बार होता है। आयोग यह तय करता है कि किन आधारों पर और किस प्रकार से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे पहले जब परिसीमन की प्रक्रिया हुई थी, तब झारखंड के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण विषय सामने आए थे। उस समय उन्होंने भी उन मुद्दों की ओर आयोग का ध्यान आकृष्ट कराया था। उन्होंने बताया कि उस दौरान झारखंड में परिसीमन की प्रक्रिया लागू नहीं हो सकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में परिसीमन आयोग इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा होगा। देशभर में परिसीमन लागू करने की दिशा में प्रक्रिया चल रही है और आयोग अपने निर्धारित संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग विभिन्न क्षेत्रों की परिस्थितियों, जनसंख्या और अन्य निर्धारित मानकों का अध्ययन कर ही अंतिम निर्णय लेता है।
August 20, 2026 6: 09 pm
Breaking
- राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के उत्थान को लेकर कलाकारों की महत्वपूर्ण बैठक, चारों बिंदुओं पर प्रस्ताव सरकार को भेजने की मांग, हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन एसडीओ को सौंपने का निर्णय
- आमदा में चोरी के गहने बरामद, चार आरोपी गिरफ्तार; करीब पांच लाख के जेवर व सामान जब्त
- सदर अस्पताल से चोरी बाइक के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, दो स्प्लेंडर बरामद
- जिला फुटबॉल सुपर लीग में हाथीटांड़ की शानदार जीत, मातकमडीह को 3-0 से हराकर अर्जुना कप की दौड़ में मजबूत की दावेदारी,
- उपायुक्त ने कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित की समीक्षा बैठक संपन्न…* *स्थानीय युवाओं को औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के निमित्त सम्बन्धित पदाधिकारियों को दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश…*
- दो साल से फरार डकैती कांड का आरोपी बदला नाम-पता, आदित्यपुर से गिरफ्तार
- खरसावां के संतारी में जहरीले सांप के डसने से दो मासूमों की मौत छह घंटे तक नहीं मिला इलाज, रास्ते में एक और अस्पताल में दूसरे बच्चे ने तोड़ा दम; गांव में पसरा मातम,
- हाईकोर्ट की 18 अगस्त की समय सीमा बीती, फिर भी अधूरा गोविंदपुर पुल का एप्रोच रोड, 13 साल से अधूरा है निर्माण, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद काम पूरा नहीं; अब 3 सितंबर की सुनवाई पर टिकी नजर
