ईसाई धर्म छोड़ दो आदिवासी परिवारों की पारंपरिक रीति से घर वापसी
बनाकेला गांव में हो समाज महासभा की मौजूदगी में हुआ पारंपरिक शुद्धिकरण, समाज में किया गया शामिल
kharsawan
खरसावां प्रखंड अंतर्गत दलाईकला पंचायत के बनाकेला गांव में शुक्रवार को ईसाई धर्म अपना चुके दो आदिवासी परिवारों ने स्वेच्छा से अपने मूल आदिवासी धर्म-संस्कृति में वापसी की। घर वापसी करने वाले परिवारों के मुखिया सुनील सोय और लखिनदर सोय हैं। आदिवासी हो समाज महासभा के पदाधिकारियों, हातु मुंडा, दियुरी तथा समाज के बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में पारंपरिक विधि-विधान से दोनों परिवारों की घर वापसी कराई गई।
घर वापसी के दौरान पारंपरिक पूजा-पाठ और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद नदी स्नान कराया गया तथा पारंपरिक मान्यता के अनुसार लाल मुर्गे की बलि देशाउली को अर्पित की गई। धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद दोनों परिवारों को पुनः गांव समाज में शामिल किया गया।
इस दौरान समाज के अगुवाओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, पर्व-त्योहार और प्रकृति पूजा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ परिवार परिस्थितियोंवश अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए थे, लेकिन अब अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को समझते हुए समाज में लौट रहे हैं। उनके अनुसार यह वापसी स्वेच्छा से और अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता के कारण हुई है।
घर वापसी करने वाले परिवारों ने कहा कि आगे वे आदिवासी समाज के पारंपरिक पर्व-त्योहारों और रीति-रिवाजों का पालन करेंगे। मागे पर्व, बाह पर्व, गोनोय दस्तूर, आंदी दस्तूर और आदींग बोंगा सहित अन्य पारंपरिक पूजा-पाठ में शामिल होने के साथ समाज के सुख-दुख में भी सहभागी रहेंगे।
कार्यक्रम में हो समाज महासभा की अध्यक्ष सावित्री कुदादा, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सोय, प्रखंड अध्यक्ष रामलाल जामुदा, मंगल सिंह जामुदा, तुराम वोयपाई, सालेन सोय, सुरज सोय, सिद्धेश्वर कुदादा, छोटे सोय, बुधराम सोय, जगमोहन सोय, राजेन सोय, सोनामुनी सोय समेत समाज के कई बुद्धिजीवी एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
September 11, 2026 9: 17 pm
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