खूंटपानी के उद्यान महाविद्यालय में स्थानीय जामुन और खजूर से मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण, छात्रों ने तैयार किए पौष्टिक उत्पाद
Khutpani
खूंटपानी के उद्यान महाविद्यालय में हेल्प-423 मॉड्यूल के तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जामुन एवं खजूर के मूल्य संवर्धन विषय पर एक प्रायोगिक गतिविधि आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय फलों की कटाई के बाद होने वाली क्षति को कम करना तथा किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय सृजन के नए अवसर विकसित करना था। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने वैज्ञानिक विधि से जामुन और खजूर का प्रसंस्करण कर कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए। इनमें जामुन रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय, जामुन फ्रूट लेदर तथा खजूर की चटनी प्रमुख रहे। इन उत्पादों को तैयार करते समय स्वाद, गुणवत्ता, पोषण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
तकनीकी मूल्यांकन में तैयार जामुन रेडी-टू-सर्व (आरटीएस) पेय का कुल घुलनशील ठोस (टीएसएस ) 13.25° ब्रिक्स, अनुमापनीय अम्लता 0.27 प्रतिशत तथा पीएच 3.85 दर्ज किया गया। इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या रासायनिक परिरक्षकों का उपयोग नहीं किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह पेय कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होने तथा हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
वहीं खजूर की चटनी का कुल घुलनशील ठोस (टीएसएस) 62° ब्रिक्स, अनुमापनीय अम्लता 2.1 प्रतिशत तथा पीएच 2.4 पाया गया। यह उत्पाद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करने में उपयोगी माना जाता है।
यह प्रायोगिक गतिविधि डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. कोयल डे एवं डॉ. अंकुंद घोष के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम में सोनिया, संगीता, श्रुति, पूजा, प्रिया, मधु, आकांक्षा, बादल, संजीत और आदर्श सहित कई विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
महाविद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को फल प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं विपणन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। यह प्रयास स्थानीय फलों की कटाई उपरांत होने वाली हानि को कम करने, पौष्टिक उत्पादों के विकास, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण उद्यमिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
October 22, 2026 10: 52 am
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