जेटेट में उड़िया सिलेबस को देवनागरी में प्रकाशित करने
पर विरोध, उड़िया भाषा के अस्तित्व के प्रति अनादर का हवाला देते
उड़िया समाज ने डीसी के द्वारा राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन,
kharsawan
झारखंड अधिविध परिषद (जेएसी), रांची द्वारा जेटेट परीक्षा के लिए उड़िया सिलेबस को उड़िया लिपि के बजाय देवनागरी लिपि में प्रकाशित किए जाने के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता नन्दू कुमार पाण्डेय ने झारखंड के राज्यपाल के नाम उपायुक्त सरायकेला-खरसावां के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराई है। ज्ञापन में कहा गया है कि उड़िया भाषा भारत की आठवीं अनुसूची में शामिल एक समृद्ध एवं प्राचीन भाषा है, जिसकी अपनी स्वतंत्र लिपि, वर्णमाला और व्याकरण है। बावजूद इसके जेएसी द्वारा जेटेट के लिए जारी सिलेबस को देवनागरी लिपि में प्रकाशित करना उड़िया भाषा एवं उसके अस्तित्व के प्रति अनादर को दर्शाता है, जिससे उड़िया भाषी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। आरोप लगाया गया है कि जहां अन्य भाषाओं के सिलेबस में गद्यांश एवं पद्यांश को शामिल किया गया है, वहीं उड़िया विषय में इस प्रकार का प्रावधान नहीं किया गया, जो भेदभावपूर्ण है। साथ ही राज्य में उड़िया भाषा के शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। ज्ञापन के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं कि है। जिसमें उड़िया सिलेबस को उसकी मूल लिपि में पुनः प्रकाशित किया जाए, गद्यांश एवं पद्यांश (10$10 अंक) को सिलेबस में शामिल किया जाए तथा और अन्य भाषाओं की तरह उड़िया भाषा के लिए भी मॉडल प्रश्न पत्र उड़िया लिपि में जारी किया जाए। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 350(बी) के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों की भाषा और लिपि के संरक्षण का प्रावधान है, जिसका पालन किया जाना आवश्यक है। ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित की गई है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर उड़िया भाषी समुदाय में असंतोष देखा जा रहा है और जल्द उचित कार्रवाई की मांग की जा रही है। ज्ञांपन सौपने के दौरान मुख्य रूप से सानंत आचार्य, पितोबास प्रधान, डॉ रंजीत आचार्य, तरूण कुमार पाणी, संजय कुमार महाती आदि उपस्थित थे।
October 24, 2026 12: 53 am
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