खरसावा-कुचाईं में करम पर्व की धूम, पारंपरिक
रीति-रिवाज के साथ शुरू हुआ जावा, पारंपरिक जावा गीत
गाकर अपनी संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरते युवतिया,
Kharsawan
खरसावां-कुचाई प्रखंड के विभिन्न गांवो में करम पर्व की धूम रही। खरसावां के उदालखाम गाँव में मंगलवार से तीन दिवसीय पारंपरिक करम पर्व की शुरुआत बड़े ही हर्षाेल्लास के साथ हो गई। त्योहार के पहले दिन गाँव की बालिकाओं और युवतियों ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ जावा उठाने का अनुष्ठान संपन्न किया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है।

मंगलवार को गाँव के पांच जावा उठा दलों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार सुरजुड़िया नदी और संखुवा नदी का रुख किया। यहाँ बालिकाओं ने नदी तट पर विशेष पूजा-अर्चना की और जावा उठाया। इस दौरान पूरा वातावरण जावा गीतों और नृत्यों से गूंज उठा। युवतियों ने कुड़माली भाषा में पारंपरिक जावा गीत गाकर अपनी संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। शुरू शुरू बाली गाई जावा उठावलों गो, हिंदेक जावा हुन्दे ढही जाय गो। इति इति जावा किया किआ जावा, जवालों मई दाना बहुरा।ष् जैसे कुडमाली गीत गाकर जावा उठाया गया । वही गाँव के बुजुर्गों और पूजा समितियों के अनुसार, पर्व के दूसरे दिन यानी 23 सितम्बर को मुख्य करम पूजा आयोजित की जाएगी। इस दिन करम पेड़ और करम डाल के समीप जावा को रखकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाएगी। पूजा के बाद ग्रामीण रात भर ढोल, मादल और नगड़ा की थाप पर पारंपरिक झूमर नृत्य और गीतों का आनंद लेंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का समापन 24 सितम्बर को करम डाल के विसर्जन के साथ होगा। विसर्जन के समय भी विदाई के पारंपरिक गीत गाए जाएंगे। इस पर्व को लेकर उदालखाम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और लोग पारंपरिक वेशभूषा में त्योहार मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। इसके अलावे खरसावां के बड़ाबांबो, मोसोडीह, शहरबेड़ा, तेतुलटांड़, सोखानडीह, छोटाबांबो, तेलायडीह, जोरडीहा, कृष्णापुर, कुचाई के मुंडादेव, बायांग, जिलिंगदा, पोंडाकाटा, जोजोहातु समेत आसपास के गांवों में लोग पूरे उत्साह के साथ करम पूजा का आयोजन कर रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने करम डाली गाड़ कर पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उपवास में रहकर करम देवता की पूजा अर्चना की. खेतों में तैयार फसल की रक्षा के लिए लोगों ने उपवास रखकर करम देवता की आराधना की।
