कुचाई के जिलिंगदा में सरहुल पर्व की तैयारी को लेकर
बैठक, 21 मार्च को मनाया जायेगा सरहुल, सरहुल केवल एक पर्व नहीं
बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के आपसी संबंधों का प्रतीक है
kuchai
कुचाई प्रखंड के जिलिंगदा गांव में प्रकृति और आदिवासी संस्कृति के महापर्व सरहुल (बाह) पर्व को लेकरएक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुचाई-खरसावां प्रखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आदिवासियों के इस प्राकृतिक पर्व को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य रूप से आगामी 21 मार्च को सरहुल पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के आपसी संबंधों का प्रतीक है। इसे सहेजकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी परंपराओं और संस्कृति से दूर होती जा रही है। इसलिए युवाओं को इस पर्व से जोड़ने तथा उन्हें जल, जंगल और जमीन के महत्व को समझाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में मुख्य रूप से मनोज कुमार सोय, मानसिंह बांकीरा, नागिन सोय, श्याम सोय, महेश मिंज, विमोली ओरांव, पुतुल उरावं, फूल कुमारी उरावं, सुमीतरा उरावं,, सरस्वती मिंज सुशीला उरावं, सुमन उरावं, मदन लकड़ा, सुनील लकड़ा, कमर सिंह उरावं, रंजीत मिंज, सनचु लकड़ा सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।
October 24, 2026 6: 56 am
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