खरसावां में वैदिक मंत्रोचार के साथ नेत्र उत्सव संर्पन्न्,
14 दिन बाद प्रभु जगन्नाथ के नव यौवन रूप के हुए दर्शन
पांरपरिक विधि विधान के तहत पुरोहित ने अदा की रस्म
Kharsawan वैदिक मंत्रोचार के साथ गुरूवार को खरसावां के जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन का नेत्र उत्सव संर्पन्न हुआ। इस वर्ष नेत्र उत्सव में पांरपरिक विधि विधान के तहत प्रभु के नव यौवन रूप के दर्शन की रस्म अदायगी गई। प्रभु जगन्नाथ की जय घोष, शंख ध्वनि एवं पारंपरिक, उन ध्वनि (हुलहुली) के बीच चतुर्थ मूर्ति के आलौकिक नवजीवन रूप के दर्शन हुए। पूजा के साथ साथ हवन किया गया। चतुर्था मूर्ति पर मिष्ठान एवं अन्य भोग चढ़ाया गया। वही मंदिर में 14 दिनों तक अणसर गृह में विश्राम के बाद रविवार को भगवान जागृत हुए। इस अवसर पर जगन्नाथ मंदिरों में नेत्र उत्सव का आयोजन किया गया। नेत्र उत्सव पर आरजू-विनती कर भगवान को शयन से उठाया जागाया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, मधु और पवित्र जल से भगवान को अभिषेक किया गया। विभिन्न तरह के फूल, रोड़ी, गुलाल से भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान को विभिन्न तरह के भोग चढाएं जाएंगे। इसके बाद भगवान का पट कुछ श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गया। मंदिरों में पूजा के दौरान काफी संख्या में भक्त पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी। मंदिरों में पूजा के दौरान पुरोहित और श्रद्धालु ही नजर आए। हर वर्ष की भाति इस वर्ष भी भंडारे का आयोजन किया गया।
एक पकवाड़ा के बाद खुला जगन्नाथ मंदिर के कपाट
देव स्नान के बाद गुरूवार को एक पखवाड़े के बाद खरसावां के सभी जगन्नाथ मंदिरों के कपाट खुल गए। बीमार होने पर 14 दिन तक मंदिर के अणसर गृह में इलाजरथ चतुर्था मुर्ति (प्रभु जगन्नाथ बलभद्र देवी सुभद्रा व सुदर्शन) स्वस्थ होकर नए कलेवर में दर्शन दिए। इससे प्रभु का नव यौवन रूप कहा जाता है। मालूम हो कि 11 जून देव स्नान पूर्णिमा पर 108 घडों की पानी से स्नान करने के कारण प्रभु बीमार हो गए थे। 14 दिनों तक अणसर गृह में प्रभु की सेवा की गयी। गई देसी नुस्खा पर आधारित जंगल की जड़ी बूटियों से तैयार दवा पिलाकर इलाज किया गया।
खरसावां-हरिभंजा में हुई नेत्र उत्सव पूजा
खरसावां के राजा प्लेस स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित नेत्र उत्सव पूजा में खरसावां राजघराने के राजकुमार गोपाल नारायण सिंहदेव, राजपुरोहित आदि उपस्थित थे। इसके अलावे हरिभंजा जगन्नाथ मंदिर में नेत्र उत्सव पर पूजा‘अर्चना की गई। नेत्र उत्सव सादगी और शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। परंपरा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाना है। बहन सुभद्रा, भाई बलराम के साथ भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए मौसी बाड़ी जाएंगे। लेकिन रथयात्रा निकाले जानें पर संयम बरकरार है।
October 22, 2026 10: 53 am
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