कोल्हान में सबसे अधिक प्रचलित खरसावां शैली
छऊ नृत्य की मान्यता न केंद्र सरकार देती है ना राज्य सरकार,
खरसावां शैली छऊ नृत्य की पहचान कब मिलेगी ?
kolhan झारखंड में छऊ की मुख्यतः तीन शैलियां प्रचलित हैं। सरायकेला मानभूम एवं खरसावां शैली। सरायकेला एवं मानभूम शैली छऊ की तो मान्यता है। परंतु सम्पूर्ण कोल्हान में सबसे अधिक प्रचलित खरसावां शैली छऊ नृत्य की मान्यता न केंद्र सरकार देती है ना राज्य सरकार। सरकार से खरसावां शैली के कलाकार पुछ रहे है कब मिलेगी खरसावां शैली छऊ नृत्य को अपनी पहचान ?। छऊ कलाकारों ने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में प्रचलित इस नृत्य शैली को अभी तक पहचान न मिलना हम सभी कलाकारों के लिए दुखद है। कोल्हान प्रमंडलीय क्षेत्र में सबसे अधिक प्रचलित खरसावां छऊ शैली लुप्त होने के कगार पर है। कोल्हान प्रमंडलीय क्षेत्र में पांच सौ से अधिक खरसावां छऊ शैली के नृत्य मडली अपनी कला के संरक्षण को लेकर सघर्षमय है। कलाकारों का मानना है कि हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारी पहचान है। इसकी रक्षा और संरक्षण हमारी कर्तव्य है। हमारी छऊ संस्कृति के विकास के लिए सभी को मिलकर आगे आना होगा। सबको अपनी सहभागिता से इसको संजोए रखना है।
कलाकारो की मुख्य मांग
विभिन्न शैलियों की छऊ कलाकारों ने सरायकेला खरसावां जिले में बंद पड़े तीनों कला केंद्रों को पूर्व व्यवस्था के तहत पुन शुरू करने, कोल्हन यूनिवर्सिटी के सिलेबस में खरसावां शैली छऊ की पढ़ाई शुरू करने, खरसावां शैली छऊ का सिलेबस तैयार करने एवं इस शैली को पूर्ण मान्यता देने के लिए कदम उठाने की मांग रखी। खरसावां छऊ की पहचान स्थापित करने, खरसावां शैली छऊ को लिपिंबद्व करने के लिए एक टीम का गठन करने, खरसावां शैली छऊ से संबंधित पुस्तक का प्रकाशन करने आदि मांग की गई।
October 22, 2026 8: 18 am
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