कुचाई तसर सिल्क परियोजना को पुनः चालू कराने की
मांग पर वृहद झारखण्ड मोर्चा ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन, गांवों की
मजबूत हेतु रोजगार उपलब्ध कराना आवश्यक-बिरसा सोय
kharsawan
वृहद झारखण्ड मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष एवं खरसावां विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी बिरसा सोय ने कई वर्षों से बंद पडी कुचाई तसर सिल्क परियोजना को पुनः चालू कराने की मांग को लेकर सरायकेला खरसावां जिला उपायुक्त के द्वारा झारखंड के राज्यपाल को पत्र भेजा है। उन्होंने ज्ञापंन के माध्यम सें कहा कि कुचाई क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान तसर सिल्क परियोजना से जुडी रही है, जिसने वर्षों तक आदिवासी, मूलवासी, किसान, तसर पालक तथा गरीब ग्रामीण परिवारों के रोजगार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यपाल को भेजे गए पत्र में बिरसा सोय ने उल्लेख किया है कि पूर्व में इस परियोजना के माध्यम से तसर उत्पादन, कीट पालन, प्रशिक्षण, किसानों को तकनीकी सहायता तथा बुनकरों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती थीं। इससे हजारों ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुचाई तसर सिल्क परियोजना के अंतर्गत संचालित अधिकांश योजनाएं बंद पडी हैं, जिसके कारण तसर पालकों, किसानों, मजदूरों और इससे जुडें परिवारों को रोजगार एवं आर्थिक संकट का सामना करना पड रहा है। साथ ही क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान भी प्रभावित हो रही है। श्री सोय ने राज्यपाल से जनहित एवं किसानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बंद पडी सभी योजनाओं को पुनः शुरू कराने तथा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई एवं निर्देश देने का आग्रह किया है, ताकि क्षेत्र के लोगों को दोबारा रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि इस आवेदन की प्रतिलिपि झारखंड के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा राज्यपाल सचिवालय को भी भेजी गई है। श्री सोय ने कहा कि झारखंड के गांवों को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय युवाओं, किसानों और मजदूरों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे पलायन पर रोक लगाई जा सके। इस दौरान उन्होंने वृहद झारखण्ड मोर्चा द्वारा संचालित अबुआ अधिकार अभियान की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह अभियान 30 जून 2026 को हूल दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड अंतर्गत आरगुंडी टोला, कोंयाबेडा साई से शुरू होगा। श्री सोय ने कहा कि गांव का विकास गांव की भागीदारी और ग्रामीणों के निर्णय से ही संभव है। जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक और संगठित होना होगा। उन्होंने झारखंड के युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, बुद्धिजीवियों एवं बेरोजगारों से अभियान में शामिल होकर अपने अधिकारों की आवाज मजबूत करने की अपील की।
September 6, 2026 8: 39 pm
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