खरसावां-कुचाई में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आस्था व उल्लास के साथ मना, श्रद्वालुओं ने व्रत रखकर मंदिरों की पूजा-अर्चना, सुख-शांति व समृद्वि की कामना
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खरसावां-कुचाई में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव का त्योहार आस्था-उल्लास, श्रद्वा, भक्ति, विश्वास एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में सुबह से श्रद्वालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्वालुओं ने व्रत रखकर पारंपरिक रीति रिवाज के तहत भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति व समृद्वि की कामना की।

खरसावां-कुचाई के राधा-माधव मंदिर खरसावां, हरि मंदिर, जगन्नाथ मंदिर हरिभंजा, जगन्नाथ मंदिर चांकड़ी, जगन्नाथ मंदिर बंदोलोहर, जगन्नाथ मंदिर दलाईकेला आदि मंदिरों में आज सुबह ही श्ऱद्वालुओं ने व्रत रखकर अष्टमी की पूजा-अर्चना की। इसके अलावे घर-घर में भी श्ऱद्वालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की गई। वही देर रात श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पश्चात श्रीकृष्ण के बाल-गोपाल रूप महास्नान कराया गया। साथ ही आरती और श्रृगार किया गया। बताया जाता है कि श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मधुरा के कारागार में जन्म लिया था। द्वापर युग में मथुरा में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा का शासन था। चूंकि भगवान स्वंय इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे संयोगों में भगवान कृष्ण की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनकी कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से सभी तरह के दुखों का अंत हो जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना करें।
