खरसावां मे गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित विशेष समारोह का आयोजन, छऊ गुरुओं का सम्मान, गुरु ही कलाकार की प्रतिभा को देता है सही दिशा-सुखराम उरांव
Kharsawan
खरसावां छऊ नृत्य कला केन्द्र में शिक्षक दिवस के अवसर पर खरसावां मे गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित विशेष समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में नन्हे-नन्हे छऊ कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान कला केन्द्र का माहौल गुरुजनों के सम्मान और छऊ कला के प्रति श्रद्धा से सराबोर रहा। कार्यक्रम में छऊ गुरु सह चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव, सरायकेला के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित छऊ गुरु सुशांत महापात्र, छऊ गुरु मो दिलदार, सेवानिवृत शिक्षक अशोक प्रधान, छऊ गुरु शिबु साहु, सुमित महापात्र, छऊ गुरु परमानंद, बसंत गणतायत, सुदीप घोड़ाई, मो. रमजान, पिनाकी रंजन, कमल महतो, नित्या शंकर नंद एवं समीर नायक को कलाकारों ने पुष्पगुच्छ एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। कलाकारों ने गुरुओं के साथ केक काटकर शिक्षक दिवस भी मनाया।

इस अवसर पर विधायक सह छऊ गुरु सुखराम उरांव ने कहा कि गुरु केवल कला सिखाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि शिष्य के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है। छऊ जैसी समृद्ध लोककला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में गुरुओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। गुरु अपने अनुभव, साधना और संस्कारों के माध्यम से कलाकारों को केवल नृत्य की बारीकियां नहीं सिखाते, बल्कि अनुशासन, समर्पण और संस्कृति से जुड़ने का संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब नई पीढ़ी आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ना बेहद जरूरी है। छऊ कला हमारी पहचान और हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इसे जीवित रखने और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए गुरु और शिष्य दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कलाकारों का आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा और लगन के साथ छऊ कला की साधना करें तथा अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

वहीं छऊ गुरु मो दिलदार ने कहा कि गुरु भगवान का ही एक रूप होता है। गुरु शिष्य के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर उसे ज्ञान और सही मार्ग की ओर ले जाता है। गुरु ही शिष्य को उसके लक्ष्य और परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है और कला के क्षेत्र में इस परंपरा को जीवंत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। समारोह के दौरान कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और गुरुओं के प्रति उनकी श्रद्धा ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम ने एक ओर जहां गुरु-शिष्य के अटूट संबंध को दर्शाया, वहीं खरसावां की समृद्ध छऊ परंपरा और संस्कृति की जीवंत तस्वीर भी पेश की। इस दौरान मुख्य रूप से विधायक सुखराम उरांव, सरायकेला के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सुशांत महापात्र, मो दिलदार, सेवानिवृत शिक्षक अशोक प्रधान, छऊ गुरु शिबु साहु, सुमित महापात्र, छऊ गुरु परमानंद, बसंत गणतायत, सुदीप घोड़ाई, मो. रमजान, पिनाकी रंजन, कमल महतो, नित्या शंकर नंद, समीर नायक, प्रांजल केसरी, एंजेल केसरी, चांदनी कुमारी, सुमित्रा रविदास, सुमन रविदास, मुकेश घोडाई, दयाल लेट, सूरज हेंब्रम आदि उपस्थित थे।
