विश्व रक्तदान दिवस पर डॉ. बिनय कुमार सिंह ने दिया प्रेरणादायी संदेश, 160 बार रक्त एवं प्लेटलेट दान कर पेश की मिसाल
kharsawan
विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर मॉडल महाविद्यालय, सरायकेला खरसावाँ के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह ने समाज को रक्तदान के प्रति जागरूक करने का आह्वान करते हुए अपने प्रेरणादायी अनुभव साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि अब तक वे 81 बार संपूर्ण रक्तदान तथा 79 बार प्लेटलेट एफेरेसिस कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए कोई रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक सतत प्रयास है।
डॉ. सिंह ने कहा कि उनके द्वारा किया गया प्रत्येक रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के जीवन में नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने बताया कि रक्त और प्लेटलेट दान की यह यात्रा उनके लिए एक आध्यात्मिक अनुभव रही है। पहली बार रक्तदान के दौरान मन में संकोच और भय था, लेकिन जब यह एहसास हुआ कि उनके रक्त से किसी की जिंदगी बची है, तब से सेवा का यह सिलसिला निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और अनावश्यक डर मौजूद हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। रक्तदान से न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिलता है, बल्कि दाता के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
डॉ. सिंह ने विशेष रूप से प्लेटलेट दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डेंगू, कैंसर और कीमोथेरेपी जैसे मामलों में प्लेटलेट्स की मांग अचानक बढ़ जाती है। चूंकि प्लेटलेट्स को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसलिए नियमित और जागरूक दाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि “रक्तदान महादान है, क्योंकि आज भी मानव रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है।” उनका संदेश आत्मप्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि समाज में प्रेरणा जगाने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा कि यदि 160 बार रक्त एवं प्लेटलेट दान करने के बाद भी वे पूर्णतः स्वस्थ और ऊर्जावान हैं, तो अन्य लोग भी बिना किसी भय के इस पुण्य कार्य में भागीदारी कर सकते हैं। विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, तकनीकी सहायकों और रक्त केंद्रों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह सेवा-यात्रा संभव हो सकी। उन्होंने लोगों से नियमित रक्तदाता बनने का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से रक्त की कमी के कारण होने वाली असमय मौतों को रोका जा सकता है तथा एक स्वस्थ, संवेदनशील और जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
September 6, 2026 9: 05 pm
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