खरसावां के ईदगाह व मस्जिदो में खुशनुमा माहौल में
अदा की गई बकरीद की नमाज, शांति व मगफिरत की मांगी सामुहिक
दुआ, कुर्बानी लोगो में त्याग की भावना जगाती है-रिजवी
kharsawan खरसावां के विभिन्न ईदगाह और मस्जिदो में खुशनुमा माहौल के बीच ईद उल अजहा (बकरीद) की नमाज अकीदत और हषोल्लास के साथ अदा की गई। शनिवार को सुबह 6‐45 बजे खरसावां के बेहरासाई ईदगाह मैदान और मस्जिद निजामुददीन गोढपुर तथा कदमडीहा के ईदगाह मैदान में सुबह 7 बजे में नमाज अदा की गई। कुर्बानी की फजीलतें बयान करते हुए ईमानों ने ईद-उल-अजहा पढाई। बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से नहा धोकर नमाजी पोषाक पहन कर मस्जिदों की और चल पडे। मस्जिद में जमा होकर कताबद्व तरीके से ईद उल अजहा की नमाज अदा की। साथ ही इमाम से खुतबे भी सुनी। इसके अलावे खुदा से मुसलमानों ने अमन-चौन व खुशहाली के साथ शांति व मगफिरत की सामुहिक दुआ की। खुतबे सुनने के बाद लोगों ने गले लगाकर एक दुसरे को बकरीद की मुबारकबाद दी। इस दौरान खरसावां के मदीना मस्जिद बेहरासाई में ईद उल अजहा की नमाज अदा करने के बाद मौलाना मो0 आसिफ इकबाल रिजवी ने कहा कि मुसलमान केवल जानवरों की ही नही बल्कि बुरी आदतो की भी कुर्बानी दे। कुर्बानी लोगो में त्याग की भावना जगाती है। खास जानवरों को सवाब की नीयत से अल्लाह की राह में जबहा करे। कुर्बानी हजरत इब्राहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत है। मोहम्मद साहब ने भी कुर्बानी का हुक्म दिया है। कुरआन पाक के सूरह कौसर में अल्लाह फरमाता है तुम अपने रब के लिए नमाज पढों और कुर्बानी करो। जबकि कदमडीहा के मौलाना ने कहा कि दुनिया में मोहब्बत व भाईचारे से बढकर कुछ भी नही। यही इंसानियत की नेक राह है। इस पर चलकर ही देश व समाज की तरक्की संभव है। नमाज अदा करने के बाद कुर्बानियांे का दौर शुरू हो गया। ईद उल अजहा से तीन दिनो तक कुर्बानी की रस्म अदा की जाती है। हजारों लोगों ने ईद उल अजहा नमाज अदा किया।

इस्लाम में कुर्बानी की है बडी अहमियत
इस्लाम में कुर्बानी की बडी अहमियत है। यह एक तरह से माल की इबादत भी है। कुर्बानी दुनिया के तमाम मुसलमानों पर फर्ज है, जो हैसियत रखते है। मोहम्म्द स. ने फरमाया जिसने नेक नीयत, खुशी और हलाल तरीके से कुर्बानी दी उसे जहन्नुम की आग से बचा लिया जाएगा।
सैकडों बकरों की गई कुर्बानी
अल्लाह की राह पर सैकडो सैकडों की संख्या में बकरे बकरों की कुर्बानी दी गई। बकरीद की नमाज के साथ शुरू हुई कुर्बानी अगले तीन दिनों तक चलेगी। ऐसी मान्यता है कि हजरत इब्राहिम अलहीसलाम ने अपने बेटे इस्माइल अलहीसलाम से स्वप्न में कहा कि तुम सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी दीे। हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के खातिर इस काम को कर दिखाया। इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बानी देने के दौरान हजरत इब्राहीम की आंखो में पटटी बंधी थी। अल्लाह ने फरिष्तों के सरदार हजरत जिबरईल को भेजकर हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बे (बकरा) को रखवा दिया। हजरत इब्राहीम ने जब बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई तो उनकी जगह वह बकरा कुर्बान हो गया। इसलिए इस याद को ताजा रखने के लिए बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।
बीडीओं, सीओ व थाना प्रभारी ने दी बकरीद की बधाई
खरसावां के कदमडीहा व बेहरासाई ईदगाह मैदान पहुचकर खरसावां प्रखंड बिकास पदाधिकारी प्रधान माझी, अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू एवं थाना प्रभारी गौरव कुमार ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को ईद उल अजहा (बकरीद) की बधाई दी। साथ ही बकरीद त्योहार को भाई-चारगी एवं शांतिपूर्व एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की।
