*विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्रखंड स्तर पर जागरूकता, प्रतियोगिता एवं विभिन्न गतिविधियों का आयोजन…*
*धात्री एवं गर्भवती महिलाओं को प्रारंभिक स्तनपान, कोलोस्ट्रम, संतुलित पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं शिशु देखभाल के संबंध में किया जा रहा जागरूक…*
Seraikella
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर 1 से 7 अगस्त, 2026 तक सरायकेला-खरसावाँ जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्रखंड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रमों का संचालन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सत्या ठाकुर के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 की थीम “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” अर्थात “जीवन की एक टिकाऊ शुरुआत के लिए स्तनपान : जो काम करता है उसे मजबूत करें” है। इस अवसर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलेभर में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

सप्ताह के दौरान विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों एवं प्रखंड स्तर पर शपथ ग्रहण, जागरूकता रैली, रंगोली प्रतियोगिता, चित्रांकन प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी, समूह परिचर्चा, पोषण परामर्श, गृह भ्रमण, मातृ समिति बैठक, स्तनपान पर परामर्श सत्र तथा अन्य जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रमों में धात्री एवं गर्भवती महिलाओं को बताया जा रहा है कि जन्म के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध (खीस/कोलोस्ट्रम) शिशु का पहला प्राकृतिक टीका है, जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं फेंकना चाहिए। साथ ही जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ करने तथा जन्म से छह माह तक केवल माँ का दूध ही पिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस अवधि में शिशु को पानी अथवा किसी भी प्रकार का ऊपरी आहार नहीं देने की सलाह दी जा रही है।
महिलाओं को संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, दूध, अंडा, मौसमी फल तथा आयरन एवं कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन, पर्याप्त विश्राम, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा छह माह के बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। साथ ही परिवार के सदस्यों से धात्री माताओं को सहयोग एवं पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने का संदेश दिया जा रहा है।
कार्यक्रमों में यह भी बताया जा रहा है कि स्तनपान से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है तथा दस्त, निमोनिया एवं अन्य संक्रमणों का खतरा कम होता है। वहीं माताओं में प्रसव के बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होने के साथ स्तन एवं अंडाशय के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों का बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान वे कार्यक्रमों में उपस्थित होकर धात्री एवं गर्भवती महिलाओं को स्तनपान, मातृ-शिशु पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक संदेश प्रदान कर रही हैं।*
