खरसावां में सादगी से उत्कल सम्मिलनी ने मनाया
91 वां उत्कल दिवस, भाषा-साहित्य के उत्थान का संक्लप
हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है- बिरोजा पति
Kharsawan
खरसावां में सोमवार को उत्कल सम्मिलनी उडिया शिक्षक संघ सरायकेला खरसावां के द्वारा सादगी से 91 वां उत्कल दिवस मनाया। उत्कल दिवस कार्यक्रम का शुभआरंभ ने राजमहल चौक स्थित पंडित उत्कल मणी गोपबंधु दास के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। इस दौरान उडिया समाज के लोगो ओड़िया भाषा संस्कृति के उत्थान का संक्लप लिया। मौके पर उत्कल सम्मिलनी उडिया शिक्षक संघ सरायकेला खरसावां के जिला उपाध्यक्ष बिरोजा पति ने कहा कि मातुभाषा अपनी सभ्यता संस्कृति के प्रति हमेशा मनोभाव रखना हम सभी का परम कर्तत्व है। समाज के बिकास में तत्पर रहनेवाले महापुरूष गोपबंधु दास ने अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित कर दिया था। उन्होने कहा कि अपने भाषा संस्कुति एवं इतिहास कोे संजोने का प्रयास करना है। ताकि दुनिया को बता सके कि हमारी संस्कृति सबसे जीेंवत और अनूठी है। जबकि उत्कल सम्मिलनी के सचिव अजय कुमार प्रधान ने कहा कि भाषा-संस्कृति को कैद कर नही रखा जा सकता है। सकारात्मक सोच के साथ भाषा संस्कृति की रक्षा कर बिकास में अपना योगदान दे। उन्होने कहा कि भाषा संस्कृति के लिए अपने जीवन को न्योछावर करने वाले गोपबंधु दास का सम्मान करना हम सभी का परम कर्तव्य है। उन्होने अपनी माटी और अपने लोगों के भविष्य के लिए वे अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया। इस दौरान उडिया समाज के लोगों से अपील किया गया कि उडिया भाषी समाज को आगामी जनगणना में अपनी भातृभाष के रूप में ओडिया का उल्लेख करे। ताकि भाषाई पहचान और अधिकारिक आंकडो में इसे सही ढ़़ग से दर्ज किया जा सके। इस दौरान मुख्य रूप से उत्कल सम्मिलनी उडिया शिक्षक संघ् के जिला उपाध्यक्ष बिरोजा पति, जिला सचिव अजय कुमार प्रधान, जिला प्ररिदर्शक सुशील षाड़गी, राजकीय कन्या मध्य विधालय खरसावां के प्रचार्य उमा कुमारी, जयजीत सांडगी, संपन मंडल, सुजीत हांजरा, भागरथी प्रसाद दे, राजु मंडल, सबिता विषेई, सपना टोप्पो, रचिता महांती, रेणु महाराणा, कनिता दे, बंदना दास, झुमी मिश्रा, बबीता मंडल आदि मौजुद थे।
हमारा आत्मा ओडिया है- सुशील
उत्कल सम्मिलनी के जिला प्ररिदर्शक सुशील षाड़गी ने कहा कि हमारा भाषा पियोर ओडिया नही है, पर हमारा आत्मा ओडिया है। हमारा रहन-सहन सहित पुरा कल्चर उडिया से जुडा है। उन्होने कहा कि हमारे आने वाले जेनरेशन को ओडिया भाषा-संस्कृति व ओडिया शिक्षा में ज्ञान देने पर विचार करना चाहिए। ताकि ओडिया मातुभाषा और अपनी सभ्यता संस्कृति को जन-जन तक पहुचाया जा सके।
October 24, 2026 1: 45 am
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