कुचाई के छोटाबाण्डी में वन अधिकार कानून व पेसा
नियम-2025 के तहत की पत्थलगड़ी, 188 एकड़ वन भूमि पर
शीला स्थापित, सबसे ऊंचा ग्राम सभा से गूंज उठा क्षेत्र,
kuchai
कुचाई प्रखंड अंतर्गत पंचायत छोटासेंगोई के ग्राम छोटाबाण्डी में वन अधिकार कानून 2006 एवं झारखंड पेसा नियमावली 2025 के तहत ऐतिहासिक पत्थलगड़ी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीण मुंडा मंगल सिंह मुण्डा तथा सीएफआरएमसी अध्यक्ष बनवारी लाल सोय के नेतृत्व में 188.02 एकड़ वन भूमि पर शीला स्थापित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत जंगल सीमा पर पूजा-अर्चना के साथ हुई। पारंपरिक वेशभूषा में ग्रामीण नाचते-गाते पत्थलगड़ी स्थल तक पहुंचे। गांव के पहान द्वारा देशवाली, सिंगिबोंगा एवं बुरुबोगा को तीन चेंना चढ़ाकर सामुदायिक समृद्धि और संरक्षण की कामना की। इस दौरान “जंगल जमीन किसका है, हमारा है “अपने गांव में अपना राज”, “न लोकसभा न विधानसभा सबसे ऊंचा ग्राम सभा” जंगल काटना बंद करो, जंगल में आग लगाना बंद करो आदि जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मौके पर सांसद प्रतिनिधि मानसिंह मुण्डा ने कहा कि सामुदायिक प्रयासों से जंगलों का घनत्व बढ़ा है और अब ग्राम सभा के नेतृत्व में वन संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। सुखराम मुण्डा ने जंगलों में आग नहीं लगाने की अपील करते हुए कहा कि जंगल अन्न भंडार और शुद्ध वायु का स्रोत है। करम सिंह मुण्डा ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए जंगल संरक्षण को आवश्यक बताया। जबकि झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के केंद्रीय सदस्य सोहन लाल कुमार ने कहा कि भारतीय वन अधिनियम 1927 के कारण ऐतिहासिक अन्याय हुए, जिन्हें दूर करने के लिए वन अधिकार कानून 2006 लागू किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में छोटाबाण्डी ग्राम को 188.02 एकड़ वन भूमि पर सामुदायिक वन अधिकार की मान्यता मिली है। कानून की धारा 5 के तहत ग्राम सभा को वन, वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण का अधिकार प्राप्त है, साथ ही जलस्रोतों और पारंपरिक विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रावधान भी है। पेसा नियमावली 2025 के नियम 32(1) के तहत ग्राम सीमा के अंदर लघु वन उपज का स्वामित्व ग्राम सभा को मान्य किया गया है। वहीं नियम 32(2) के अनुसार ग्राम सभा सामुदायिक वन संसाधनों का संरक्षण और प्रबंधन करेगी। अधिनियम के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। कार्यक्रम के अंत में अन्य वक्ताओं ने कहा कि विधि के अधीन रहकर वन संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जाए, ताकि जंगल बचे, पर्यावरण संतुलन बना रहे और आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहें। इस दौरान मुख्य रूप से अशोक मानकी, सोहन लाल कुम्हार, टेने मुण्डारी, फागु मुण्डा, शैलेन्द्र हेम्ब्रम, रसाय मुण्डा, लक्ष्मण हेम्ब्रम, बागुन सोय, दुखु मुण्डा, मुटु भूमिज, हीरा मुनी भूमिज, प्यारी भूमिज, सोनाराम भूमिज, नारायण सोय, बुधन लाल भूमिज, बसंती सोय, धर्मेन्द्र सिंह मुण्डा, करम सिंह मुण्डा आदि उपस्थित रहे।
July 23, 2026 11: 23 am
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