राजस्व कर्मचारी की हत्या पर भड़के अर्जुन मुंडा, बोले— जमीन माफियाओं पर हो ठोस कार्रवाई
रिम्स में शोकाकुल परिजनों से मिले पूर्व मुख्यमंत्री, हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग
राजस्व कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार, प्रभावशाली लोगों के संरक्षण की भी हो जांच
Ranchi
रांची, 25 अक्टूबर। नामकुम में अरगोड़ा अंचल के राजस्व कर्मचारी लक्ष्मीकांत मुंडा की हत्या को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोर सजा दिलाने की मांग की। रविवार को लक्ष्मीकांत मुंडा के पार्थिव शरीर के पोस्टमार्टम के दौरान रिम्स परिसर पहुंचे अर्जुन मुंडा ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब सरकारी कर्मचारी अपने घर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? उन्होंने संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारियों से बात कर मामले में त्वरित कार्रवाई करने और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की।
जमीन माफियाओं की भूमिका की हो जांच
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी रांची सहित शहरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन माफियाओं की बढ़ती सक्रियता चिंताजनक है। सरकार को इनके खिलाफ ठोस अभियान चलाना चाहिए। लक्ष्मीकांत मुंडा हत्याकांड में जमीन माफियाओं की संभावित भूमिका समेत सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति या प्रशासनिक तंत्र से जुड़े लोगों के संरक्षण की बात सामने आती है, तो उनकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जमीन की पैमाइश, भूमि अभिलेखों और राजस्व संबंधी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। भूमि संबंधी अनियमितताओं की जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रभावशाली लोगों के दबाव और माफिया गठजोड़ से जुड़ी शिकायतों की भी पड़ताल होनी चाहिए।
राजस्व कर्मचारियों को मिले सुरक्षित माहौल
अर्जुन मुंडा ने कहा कि ईमानदारी से काम करने वाले राजस्व कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। जमीन विवादों और भू-माफियाओं से जुड़े गंभीर मामलों की जांच के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए। तय अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर देरी के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर मामलों को स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपने और गंभीर मामलों में सीबीआई जांच की दिशा में कदम उठाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था जरूरी है। जमीन माफियाओं के दबाव और आतंक के बीच न तो नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रह सकते हैं और न ही राजस्व कर्मचारी निर्भय होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं। सरकार को कानूनी एवं प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत कर ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
