कुचाई में आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक, अंतरराष्ट्रीय
आदिवासी दिवस एक मंच पर मनाने का निर्णय, यह दिवस अधिकारों
और संवैधानिक प्रावधानों पर गंभीर मंथन होना चाहिए-सोहन
kuchai
कुचाई स्थित मुण्डा-मानकी सभागार में आदिवासी सामाजिक मंच, ग्राम सभा मंच, मानकी-मुण्डा संघ, आदिवासी हो महासभा, आदिवासी एकता मंच, झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन, सामुदायिक वन पालन समिति समेत विभिन्न संगठनों की संयुक्त बैठक सुखराम मुण्डा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों से जुडे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस कुचाई में सभी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक मंच से मनाया जाएगा।

वहीं 27 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान, रांची में ग्राम सभा मंच, झारखंड के नेतृत्व में लगभग 3 से 4 हजार ग्राम सभाओं की आमसभा आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक को संबोधित करते हुए सोहन लाल कुम्हार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित न रहकर आदिवासी समाज के अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों पर गंभीर मंथन का अवसर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर की आमसभा में वनाधिकार कानून-2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार पत्र जारी करने, पेसा नियमावली में ग्राम सभा से जुडे प्रावधानों, दलमा वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन से प्रभावित 136 गांवों के मुद्दे तथा मुण्डारी खूँटकट्टी गांवों की मान्यता जैसे विषयों पर सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। जबकि अशोक मानकी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दिन केवल नृत्य-संगीत तक सीमित न रहकर यह भी समीक्षा की जानी चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा आदिवासियों को मान्यता प्राप्त अधिकारों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनमें कितना ह्रास हुआ है। वहीं तुलसीपीड के मानकी मंगल सिंह मुण्डा ने कहा कि कुचाई में आदिवासी दिवस एक मंच से मनाया जाए और इसे राजनीतिक रंग देने से बचा जाए। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर 28 जुलाई को पुनः बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्य रूप से सोहन लाल कुम्हार, सुखराम मुण्डा, अशोक मानकी, मंगल सिंह मुण्डा, मानकी मुण्डा, मांगी लाल सुम्बुरूई, सुनील सोय, भरत सिंह मुण्डा, कुडिया सोय, दुखु मुण्डा, मनोज मुदुईया सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
