खुंटपानी के बादिया के मांगे पर्व में पूर्व मुख्यमंत्री
पहुचकर ढोल-नगाडे की थाप पर थिरकते नजर आए, मांगे पर्व
न केवल प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है-अर्जुन मुंडा
khutpani खुंटपानी प्रखंड के अंतर्गत बादिया गांव में आयोजित मांगे पर्व में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। जहां ग्रामीणों ने मांदर बजा कर तथा सामूहिक नृत्य करते हुए उनका स्वागत किया। श्री मुंडा ने ग्राम वासियों संग अखड़ा में सामूहिक नृत्य में शामिल हुए। साथ ही ढोल-नगाडे की थाप पर थिरकते नजर आए। मौके पर श्री मुडा ने कहा कि समाज के लोग संगठित होकर अपनी संस्कृति की रक्षा करें। मांगे पर्व हमारे आदिवासी समाज का मुख्य त्योहार है। पर्व त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि हम चाहें जितना भी आधुनिक हो जाएं। अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को न भूलें। कला और संस्कृति से ही हमारी विशेष पहचान है। साथ ही हमें समाज को जागरूक और शिक्षित करने की जरूरत है, ताकि हमारे बच्चे पढ़ लिखकर समाज का नाम ऊंचा करें। भाषा संस्कृति बचाए रखने के लिए इस तरह का आयोजन करना भी जरूरी है। उन्होने कहा कि मांगे पर्व में प्राकृति यानी जल, जंगल, जमीन को पूजा होती है। गांव के बड़े बुजुर्ग, माताओं, बहनों एवं युवा साथियों के साथ मिलकर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति पूजक जनजाति समुदाय को सामूहिकता और समग्रता को दर्शाता है। यह पर्व न केवल प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बल्कि सहज सरल एवं संतुलित जीवन पद्धति के भी दर्शाता है। जो अनुकरणीय है। हो समुदाय में प्रचलित यह लोकीति “सेनगे सुसुन, काजी गे दुरंग“ अर्थात चलना ही नृत्य और बोली ही संगीत उनके जीवन शैली को गहरी दर्शांनिकता की प्रकट करती है। इस कार्यक्रम में काफी संख्या में लोगों उपस्थित थे।
September 6, 2026 4: 31 pm
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