खरसावां मे
73 किसानों को वैज्ञानिक तसर उत्पादन का प्रशिक्षण, माइक्रोस्कोप से पेब्रिन रोग की पहचान का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण, किसानों को बांटी गई छतरियां, विशेषज्ञों ने स्वच्छता, बीज उत्पादन, कोकून विपणन और वैज्ञानिक कीटपालन के बताए गुर
kharsawan
खरसावां पथ निरीक्षण भवन परिसर मे केंद्रीय रेशम बोर्ड के बुनियादी बीज संवर्धन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीएसबी-बीएसएमटीसी) के पायलट प्रोजेक्ट सेंटर (पीपीसी), खरसावां में राष्ट्रीय “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान के तहत जागरूकता सह किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खरसावां क्षेत्र के 73 रेशम किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को वैज्ञानिक तसर कीटपालन और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना, तसर कोकून की उत्पादकता व गुणवत्ता बढ़ाना तथा रेशम किसानों की आजीविका को मजबूत करना रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को तसर कीटपालन, बीज उत्पादन, स्वच्छता, रोग नियंत्रण और कोकून के बेहतर विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बीटीएसएसओ बिलासपुर की निदेशक डॉ. जी. पुनितावती ने झारखंड में तसर रेशम उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की रणनीति पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि सहायक उद्योग निदेशक (रेशम), चाईबासा रविशंकर प्रसाद ने किसानों को राज्य सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी दी। पीपीओ हाटगमहरिया प्रदीप कुमार महतो ने वैज्ञानिक तरीके से तसर कीटपालन एवं उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए। पीपीओ खरसावां नितिश कुमार ने किसान स्तर पर ग्रेनेज (बीज उत्पादन) प्रबंधन के महत्व को समझाया। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने कीटपालन क्षेत्र में स्वच्छता और नियमित कीटाणुशोधन को बेहद जरूरी बताया। वहीं रॉ मटेरियल बैंक के सहायक सचिव राममोहन प्रमाणिक ने कोकून विपणन, मूल्य निर्धारण और किसानों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण किसानों के लिए आयोजित हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रहा। वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने माइक्रोस्कोप के माध्यम से पेब्रिन रोग की पहचान करने की विधि किसानों को प्रत्यक्ष रूप से समझाई। किसानों को रोग की समय पर पहचान और रोगमुक्त बीज के उपयोग के महत्व की जानकारी दी गई।
समापन से पहले आयोजित किसान संवाद में किसानों ने अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं का समाधान बताते हुए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। इसके बाद रेशम कीटपालन के दौरान धूप और बारिश से बचाव के लिए किसानों के बीच छतरियों का वितरण किया गया।
