खरसावां में पारंपरिक हेरा पंचमी पर निभाई गई
सदियों पुरानी रथ भंगिनी की परंपरा, नाराज महालक्ष्मी ने
प्रतीकात्मक रूप से तोड़ा प्रभु जगन्नाथ का रथ,
kharsawan
खरसावां में रथयात्रा महोत्सव के पांचवें दिन सोमवार की रात खरसावां के जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक हेरा पंचमी उत्सव श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सदियों पुरानी रथ भंगिनी की परंपरा का निर्वहन किया गया, जिसमें माता महालक्ष्मी ने प्रतीकात्मक रूप से भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष का एक हिस्सा तोड़ा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी स्थित गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं। पांच दिन बीत जाने के बाद भी जब वे श्रीमंदिर वापस नहीं लौटते, तो माता महालक्ष्मी नाराज होकर स्वयं उन्हें लेने गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। इसी प्रसंग को हेरा पंचमी के रूप में मनाया जाता है। अनुष्ठान के तहत लक्ष्मी मंदिर से माता महालक्ष्मी की प्रतिमा को भव्य पालकी में विराजमान कर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया गया। वहां मंदिर के बाहर खड़े भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष पर माता की प्रतिमा स्थापित कर रथ का एक हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से तोड़ा गया। मंदिर के सेवायतों ने पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सभी धार्मिक रस्मों का निर्वहन किया। इस दौरान गुंडिचा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त पूरे उत्साह के साथ भजन-कीर्तन करते रहे और ष्जय जगन्नाथष् के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। हेरा पंचमी का यह अनुष्ठान रथयात्रा महोत्सव का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु खरसावां पहुंचते हैं।
