रांची में छऊ कला की जीवंत प्रस्तुति, गुरु तपन कुमार पटनायक ने साझा किया अनुभव
Ranchi
रांची, 31 मई 2026: संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्त संस्था) द्वारा आयोजित “प्रातः स्मरण” कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को रांची के ऑडिटोरियम सभागार में छऊ कला एवं नाट्य परंपरा पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड के सहयोग से किया गया।

इस अवसर पर छऊ कला के वरिष्ठ गुरु एवं प्रख्यात प्रस्तोता गुरु तपन कुमार पटनायक ने छऊ नृत्य की परंपरा, इतिहास, तकनीक तथा विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदर्शन के माध्यम से छऊ की बारीकियों, मुखौटों के महत्व, शारीरिक मुद्राओं और इसकी सांस्कृतिक विरासत से उपस्थित लोगों को अवगत कराया।
कार्यक्रम में नाटक एवं लोक कला क्षेत्र के कई विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा तथा लोक कलाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुरु तपन कुमार पटनायक सरायकेला छऊ शैली के प्रमुख हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं। उन्हें छऊ कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वे बिहार संगीत नाटक अकादमी की कार्यकारिणी समिति के सदस्य रह चुके हैं तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की विभिन्न सांस्कृतिक योजनाओं से भी जुड़े रहे हैं।
अपने संबोधन में गुरु पटनायक ने बताया कि छऊ नृत्य केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि लोक जीवन, प्रकृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम है। उन्होंने छऊ की विभिन्न प्रस्तुतियों—महिषासुर वध, रामायण, महाभारत, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा जन-जागरूकता से जुड़े विषयों पर आधारित रचनाओं का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में कलाकारों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा कला प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय लोक एवं पारंपरिक कलाओं से जोड़ना तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक करना था।
