मंच का कलाकार चला गया, यादें छोड़ गया, रंजन पटनायक को भावभीनी श्रद्धांजलि
Seraikella
सरायकेला। सरायकेला की छऊ और नाट्य कला जगत में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाले कलाकार रंजन कुमार पटनायक के आकस्मिक निधन से कला प्रेमियों में शोक की लहर है। उनके निधन से कलाकारों और संस्कृति से जुड़े लोगों ने एक ऐसे साथी को खो दिया, जिसकी कला मंच तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह सरायकेला की सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ था। दिवंगत कलाकार की आत्मा की शांति के लिए गुरुवार की शाम उत्कलमणि आदर्श पाठागार भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
पाठागार के सचिव जलेश कवि की अध्यक्षता में आयोजित सभा में मौजूद लोगों ने रंजन कुमार पटनायक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर भगवान से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। माहौल में खामोशी थी, लेकिन हर चेहरे पर दिवंगत कलाकार की यादें साफ झलक रही थीं।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि रंजन पटनायक छऊ कलाकार होने के साथ-साथ एक अच्छे ड्रामा एवं नाट्य कलाकार भी थे। अभिनय के प्रति उनकी लगन और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें अपने साथियों के बीच अलग पहचान दी। उनके जाने से सरायकेला के कला और सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। वक्ताओं ने कहा कि कलाकार भले ही दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसकी कला, उसकी स्मृतियां और मंच पर छोड़ी गई छाप लंबे समय तक जीवित रहती हैं।
श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ मुखौटाकार एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सुशांत महापात्र, पाठागार के उपाध्यक्ष सुदीप पटनायक, चंद्रशेखर कर, चिरंजीवी महापात्र, काशी कर, भोला महंती, हलधर दाश, राजेश महंती, चक्र मोहंती एवं पवन कवि समेत अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने दिवंगत कलाकार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया।
