मुसलमानों का दूसरा सबसे बडा पर्व बकरीद
आज, कुर्बानी पर फर्ज, जहन्नुम से बचाएगी कुर्बानी
कुर्बानी हजरत इब्राहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत
kharsawan
मुसलमानों का दूसरा सबसे बडा पर्व ईद उल अजहा (बकरीद) है। जो आगामी 28 मई को मनाया जाएगा। इसे लेकर समुदाय के लोग तैयारी में जुट गए है। कुर्बानी का बकरा खरीदने के लिए इन दिनों साप्ताहिक हाट, बजारों में भीड उमड रही है। साथ ही समुदाय के लोग गांव गांव का चकर लगा रहे है। कुर्बानी के लिए खरसावां में 10 से लेकर 50 हजार तक के बकरे बजार में उतारे जा रहे है। वही विभिन्न क्षेत्रों से लोग 70 हजार तक के बकरे खरीद कर ला रहे है। कुर्बानी पर खरसावां के बेहरासाई मौलाना मो0 आसिफ इकबाल रजवी ने कहा कि खास जानवरों को बकरीद के दिन सवाब की नीयत से अल्लाह की राह में जबहा किया जाता है जो कुर्बानी कहलाती है। यह कुर्बानी हजरत इब्राहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत है। मोहम्मद साहब ने भी कुर्बानी का हुक्म दिया है। कुरआन पाक के सूरह कौसर में अल्लाह फरमाता है तुम अपने रब के लिए नमाज पढों और कुर्बानी करो।
ईद उल अजहा के नमाज का समय मुकर्रर
खरसावां में ईद उल अजहा (बकरीद) का समय मुकर्रर कर दिया गया है। मदीना मस्जिद बेहरासाई में सुबह 6.30 बजे। कदमडीहा के ईदगाह में सुबह 7 बजे बकरीद की नमाज अदा की जाऐगी। वही मस्जिद निजामुददीन गोढपुर में 7 बजे नमाज अदा की जाएगी।
हैसियत वालों पर फर्ज है कुर्बानी
इस्लाम में कुर्बानी की बडी अहमियत है। यह एक तरह से माल की इबादत भी है। कुर्बानी दुनिया के तमाम मुसलमानों पर फर्ज है, जो हैसियत रखते है। मोहम्म्द स. ने फरमाया जिसने नेक नीयत, खुशी और हलाल तरीके से कुर्बानी दी उसे जहन्नुम की आग से बचा लिया जाएगा। मोहम्म्द स. ने फरमाया जब तुम बकरीद का चांद देखो और कुर्बानी की नीयत कर लो तो अपने बाल और नाखून ना कटवाओ।
कुर्बानी का समय
बकरीद के दिन यानि दसवीं जिलहिज्जा को मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह नहा धोकर व साथ कपडे पहनकर नमाज के लिए ईदगाह या मस्जिदों में जाते है। दो रकात नमाज अदा करने के बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है जो बारहवीं जिलहिज्जा तक चलती रहती है।
क्यों की जाती है कुर्बानी
अल्लाह के नबी हजरत इब्राहीम अ0 को अल्लाह ने आजमाइश के लिए ख्वाब दिखाया कि वो अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को अल्लाह की राह में कुर्बान करे। हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के खातिर इस काम को कर दिखाया। इकलौते बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बानी देने के दौरान हजरत इब्राहीम की आंखो में पटटी बंधी थी। अल्लाह ने फरिश्तों के सरदार हजरत जिबरईल को भेजकर हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बे (बकरा) को रखवा दिया। हजरत इब्राहीम ने जब बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई तो उनकी जगह वह बकरा कुर्बान हो गया। इसलिए इस याद को ताजा रखने के लिए बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।
July 24, 2026 4: 12 am
Breaking
- जिला फुटबॉल लीग: दीनबंधु चक्रधरपुर की पहली जीत, सेरेंगदा ने आरएफटीसी को हराकर किया उलटफेर
- माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक ने किया पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय अरूवां कुचाई का औचक निरीक्षण, पीएम श्री विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास-अल्का जायसवाल
- खरसावां के बडाकुडमा में 108 कलश यात्रा के साथ माँ तारिणी की पारंपरिक श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न, भक्तिमय माहौल में उमडे श्रद्धालु,
- जिला फुटबॉल लीग: हाथीटांड़ ने राजनगर को 5-0 से रौंदा, हरिहरपुर ने अयांश पावर को हराया
- मानदेय वृद्धि सहित छह सूत्री मांगों को लेकर संघ में विधायक दशरथ गागराई को सौंपा ज्ञापन।
- कुचाई सीएचसी में मलेरिया नियंत्रण को लेकर चला विशेष फॉगिंग अभियान, मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग जरूरी-डॉ. सुजीत मुर्मू
- कुचाई में आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक, अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस एक मंच पर मनाने का निर्णय, यह दिवस अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों पर गंभीर मंथन होना चाहिए-सोहन
- जिला फुटबॉल लीग: सेरेंगदा और खामरडीह की शानदार जीत, रोहित कुदादा ने जमाई हैट्रिक
