खरसावां के उत्क्रमित उच्च विद्यालय पदमपुर में वायरल अश्लील वीडियो मामलाः डीईओ की जांच में नया खुलासा, दो छात्रों ने मोबाइल से प्रोजेक्टर पर चलाया था अश्लील वीडियो
Kharsawan
खरसावां प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पदमपुर में कथित अश्लील वीडियो वायरल होने के मामले ने शुक्रवार को तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय के लिपिक राजीव लोचन साहू पर दसवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाने का आरोप लगाते हुए विद्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए लिपिक एवं प्रधानाध्यापिका के स्थानांतरण की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप था कि विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है और इस घटना से छात्र-छात्राओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सूचना मिलने पर खरसावां थाना प्रभारी राहुल कुमार सिंह भी विद्यालय पहुंचे और ग्रामीणों एवं अभिभावकों को शांत कराया।
वहीं, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शिखा सुमन ने कहा कि मामले की जानकारी उन्हें मिली है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरे प्रकरण की जांच संबंधित विभाग द्वारा कराई जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद कुछ समय के लिए ग्रामीणों ने विद्यालय में ताला भी जड़ दिया था।

जानकारी के अनुसार गुरुवार को घटना उस समय हुई जब विद्यालय में स्मार्ट क्लास चल रही थी। बताया गया कि लिपिक किसी कार्य से कुछ देर के लिए कक्षा से बाहर गए थे। इसी दौरान दो छात्र अपने मोबाइल फोन को स्मार्ट क्लास के प्रोजेक्टर से जोड़कर कथित अश्लील वीडियो चला दिए। बाद में किसी ने उसका वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कैलाश चंद्र मिश्रा स्वयं विद्यालय पहुंचे और छात्रों, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन से पूछताछ कर जांच की।
जांच के बाद डीईओ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में लिपिक और प्रधानाध्यापिका की संलिप्तता सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के दो छात्र अपने घर से मोबाइल लेकर आए थे और उसी मोबाइल को प्रोजेक्टर से जोड़कर वीडियो चला दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट क्लास में इस प्रकार की घटना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
डीईओ ने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आते ही उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल विद्यालय पहुंचकर जांच की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अनुशासन और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि विस्तृत जांच में किसी भी व्यक्ति की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो विभागीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना पूरी जांच के किसी भी कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी जाएगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, डीईओ की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि वायरल वीडियो विद्यालय के दो छात्रों द्वारा अपने मोबाइल फोन से प्रोजेक्टर पर चलाया गया था। हालांकि, पूरे मामले की विभागीय जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
