खरसावां के पतपत में इंडीजीनस यात्रा के तहत जल, जंगल, जमीन और जीवन पर सामुदायिक मंथन, गांव के विकास और बेहतर भविष्य पर बनाइ रणनीति,
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खरसावां प्रखंड अंतर्गत रिड़िंग पंचायत के ग्राम पतपत बरगीपुट में इंडीजीनस यात्रा के तहत जल, जंगल, जमीन और जीवन से जुड़े मुद्दों पर सामुदायिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की सहभागिता से गांव का सामुदायिक एवं जल संसाधन मानचित्र तैयार किया गया। इस मानचित्रण के माध्यम से जल स्रोतों, जंगलों, कृषि भूमि, सामुदायिक परिसंपत्तियों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया। साथ ही भविष्य में गांव के विकास के लिए आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों की जरूरतों को भी चिन्हित किया गया। बैठक में जल संरक्षण, जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति, बदलते मौसम और गांव के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण गांव के सतत विकास और बेहतर भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं ने जल, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सीधे परिवार और समुदाय के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पानी लाने में ही प्रतिदिन तीन से चार घंटे का समय व्यतीत हो जाता है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कार्यक्रम स्थल से ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंता से संपर्क कर गांव के खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत का अनुरोध किया गया। अभियंता ने दो से तीन दिनों के भीतर मरम्मत कार्य कराने का आश्वासन दिया। युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, खेती, पलायन और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंताएं और सुझाव साझा किए। उन्होंने गांव के विकास और संसाधनों के संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया। वहीं, बुजुर्गों ने गांव के इतिहास, पारंपरिक जल स्रोतों, जंगलों और आदिवासी ज्ञान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान आज भी समुदाय को बेहतर भविष्य की दिशा दिखाने की क्षमता रखता है। संवाद के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि जल, जंगल, जमीन, जैव विविधता, संस्कृति और आजीविका एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। इनके संरक्षण के बिना समुदाय की पहचान, अस्तित्व और भविष्य की कल्पना संभव नहीं है।कार्यक्रम में विशेष रूप से मनोज कुमार सोय, हरिओम प्रकाश, वीर सिंह सिजोई सहित राजकिशोर हांसदा, दासाय मुंडा, दुलाल हांसदा, लखीराम सरदार, सामु मुंडा, गोलियां मुंडा, समाद बोदरा, हेनसिह सरदार, मोहन सिंह हांसदा, जुनीराम हांसदा, सोराय पाड़िया, फुलमनी पाड़िया, जसमती हांसदा, बुधनी पाड़िया, मोगरो हांसदा, लीलमनी बोदरा, रुईबरी हांसदा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
October 22, 2026 7: 23 am
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