कोचांग में धुमकुड़िया भवन की आधारशिला, सांसद कालीचरण मुंडा ने कहा—संस्कृति और युवा शक्ति का बनेगा केंद्र, कल्याण विभाग की योजना से होगा निर्माण, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ग्रामीणों ने सांसद का किया स्वागत, सांसद बोले- धुमकुड़िया आदिवासी संस्कृति, परंपरा और युवा शक्ति का प्रतीक
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अड़की प्रखंड की कोचांग पंचायत में गुरुवार को कल्याण विभाग की योजना के तहत प्रस्तावित धुमकुड़िया भवन के निर्माण की आधारशिला रखी गई। खूंटी लोकसभा सांसद कालीचरण मुंडा ने विधिवत शिलान्यास कर निर्माण कार्य की शुरुआत की। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सांसद एवं कांग्रेस नेताओं का स्वागत किया।
शिलान्यास के मौके पर सांसद कालीचरण मुंडा ने कहा कि धुमकुड़िया आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और युवा शक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रस्तावित भवन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ पारंपरिक ज्ञान, नृत्य, भाषा और सामाजिक मूल्यों को सीखने का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि खूंटी की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
ईमानदारी और गुणवत्ता से काम पूरा करने पर जोर
कार्यक्रम में खूंटी जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रवि मिश्रा ने धुमकुड़िया भवन की पहल के लिए सांसद और कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए ऐसे केंद्र महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विभाग एवं संवेदक से निर्माण कार्य को पूरी ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा करने की बात कही।
बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
कार्यक्रम में सभी प्रकोष्ठों के को-ऑर्डिनेटर सह जिला सांसद प्रतिनिधि पीटर मुंडू, प्रदेश सहकारिता प्रकोष्ठ के महासचिव नईमुधीन खां, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि विलसन तोपनो, सुनीता गोप, सचिदानंद शहदेव, पंचायत की मुखिया दुलारी हेम्ब्रोम, ग्राम प्रधान कालीदास मुंडा, कयूम अंसारी, तलहा खां, बसंत सेठ, सोरेन दास, जोसेफ कंडीर, पंचायत समिति सदस्य, कांग्रेस कार्यकर्ता समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने धुमकुड़िया भवन के निर्माण की शुरुआत पर खुशी जताते हुए सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया। भवन के निर्माण से क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों को सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक व्यवस्थित स्थान मिलने की उम्मीद जताई गई।
