झारखंड आंदोलनकारियों ने छह सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, 1932 आधारित स्थानीय नीति एवं नियोजन नीति लागू करने की मांग, दो माह में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो नवंबर से आंदोलन की दी चेतावनी,
Kharsawan
झारखंड आंदोलनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रांची के मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम
ज्ञापन सौंपा है। झारखंड आंदोलनकारी ने अपने सौपे गए ज्ञापन में स्थानीय एवं नियोजन नीति लागू करने, पेसा कानून-1996 के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने, आंदोलनकारियों की सम्मान राशि बढ़ाने सहित छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। ज्ञापन में आंदोलनकारियों ने कहा है कि अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने अपना बहुमूल्य समय, जीवन और संघर्ष समर्पित किया। कई लोगों ने आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई, जबकि कई परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों और आदिवासी-मूलवासी झारखंडियों की समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं।

आंदोलनकारियों की पहली मांग 1932 के खतियान आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति को प्रभावी रूप से लागू करने की है, ताकि झारखंडियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिल सके। दूसरी मांग पेसा नियमावली-2025 में आवश्यक संशोधन कर पेसा कानून-1996 की मूल भावना और उसके 23 प्रमुख प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने तथा ग्राम सभाओं को उनके संवैधानिक अधिकार देने की है।
तीसरी मांग के तहत झारखंड आंदोलनकारियों की सम्मान राशि बढ़ाकर कम से कम 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा प्रत्येक चिह्नित आंदोलनकारी के एक आश्रित को उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी में सीधी नियुक्ति देने की मांग की गई है। ज्ञापन में आंदोलनकारी चिह्नितीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के मुफस्सिल थाना कांड संख्या 73/89 में स्थानीय आंदोलनकारियों की अनदेखी कर दूसरे थाना क्षेत्रों के कई लोगों को राशि लेकर आंदोलनकारी के रूप में चिह्नित किया गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी व्यक्तियों और उन्हें लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावे अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन में वन विभाग की भूमिका उदासीन है, जिससे धरातल पर कार्य नहीं हो रहा है। वन विभाग के पदाधिकारियों पर अंकुश लगाने तथा झारखंड में अगला पचास वर्षों तक भूमि अधिग्रहण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। साथ ही उपर्युक्त माँगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए दो माह के अन्दर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई अन्यथा झारखंड आंदोलनकारी नवम्बर माह से झारखंडियों का न्याय, मान सम्मान, हक अधिकार के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी। मुख्यमंत्री के नाम पर सचिवालय में ज्ञापन सौपने वालों में मुख्य रूप से झारखंड आंदोलनकारी धनपति सरदार, सोनाराम सोरेन, सुखलाल हेंब्रम, वीरेंद्र पड़िया, लखन मुंदूईया, शांति प्रधान, मृत्युंजय किसकू, सोमचांद माझी, भगत बेसरा, बिजली माझियांन, सोमचांद सिंह सरदार, योगेश्वर बेसरा, दुर्गा हो, तारापदो महतो, जन्मजय मंडल, पूलक सतपति, राजेश माडी आदि शामिल थे।
