खूंटपानी के पांड्रासाली में रूंगटा कंपनी की साइडिंग बंद कराने की मांग, विधायक को सौंपा मांग पत्र, भूमि बचाओ संघर्ष समिति ने खेती, जलस्रोत और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने का लगाया आरोप,
12 गांवों के 10 हजार ग्रामीणों के प्रभावित होने का दावा, सीएनटी एक्ट और पेसा कानून के उल्लंघन की जांच कर कार्रवाई की मांग,
Khutpani
खूँटपानी प्रखंड अंतर्गत पांड्रासाली रेलवे स्टेशन के समीप रूंगटा कंपनी की ओर से संचालित साइडिंग और खनिज भंडारण गतिविधियों को बंद कराने की मांग उठी है। भूमि बचाओ संघर्ष समिति, खूँटपानी ने खरसावां विधायक दशरथ गागराई को मांग पत्र सौंपकर परियोजना को तत्काल बंद कराने, संबंधित रैयती एवं सामुदायिक भूमि को खाली कराने तथा मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
समिति ने आरोप लगाया है कि साइडिंग से निकलने वाले धूल-कण और बारिश के दौरान बहकर आने वाले दूषित पानी से आसपास के गांवों की कृषि भूमि, फसल, तालाब और पारंपरिक जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं। इससे ग्रामीणों की आजीविका, पशुपालन और स्वास्थ्य पर भी खतरा उत्पन्न हो रहा है।
धूल और दूषित पानी से खेती प्रभावित होने की शिकायत
मांग पत्र के अनुसार, पांड्रासाली रेलवे स्टेशन के समीप स्थापित साइडिंग में लौह अयस्क, आयरन, कोयला, डोलोमाइट, क्लिंकर समेत अन्य खनिजों की लोडिंग-अनलोडिंग और भंडारण किया जा रहा है। समिति का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण आसपास के क्षेत्रों में धूल-कण का फैलाव बढ़ा है। बारिश के दौरान साइडिंग से बहकर आने वाले लाल, सफेद और काले रंग के पानी तथा गाद के खेतों में जमा होने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है।
समिति ने आशंका जताई है कि इससे धान समेत अन्य फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। तालाबों और पशुओं के चारे के दूषित होने के साथ पांड्रासाली चौक के होटलों में तैयार खाद्य सामग्री पर भी धूल जमने की बात कही गई है। ग्रामीणों के अनुसार, पारंपरिक पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले चुआं और अन्य जलस्रोतों में भी दूषित पानी पहुंचने की आशंका है। इसके अलावा, भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से दुर्घटनाओं और मवेशियों की मौत की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है।
ग्रामसभा की सहमति नहीं लेने का आरोप
भूमि बचाओ संघर्ष समिति ने दावा किया है कि परियोजना को स्थापित करने से पहले प्रभावित गांवों की ग्रामसभाओं से सहमति नहीं ली गई। समिति के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और आदिवासी बहुल होने के कारण यहां ग्रामसभा के अधिकारों तथा पारंपरिक भूमि-संसाधनों की सुरक्षा का विशेष महत्व है।
मांग पत्र में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 (सीएनटी एक्ट), पेसा अधिनियम, 1996 और झारखंड पेसा नियमावली-2025 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए भूमि हस्तांतरण, ग्रामसभा की सहमति और पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है। समिति ने आरोप लगाया है कि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना साइडिंग स्थापित की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
12 गांवों के प्रभावित होने का दावा
समिति ने मटकूबेड़ा, होरलोर, उनचुड़ी, सनचीरू, खुन्टा, पताहातु, तोरसिंदुरी, केंदुलोटा, कुम्हारलोटा, उपरलोटा, पांड्रासाली और उलीराजाबासा सहित 12 गांवों के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने का दावा किया है। उसके अनुसार, परियोजना से करीब 5,000 एकड़ जमीन और लगभग 10,000 ग्रामीण प्रभावित हो सकते हैं।
समिति ने यह भी कहा है कि प्रभावित गांवों में ग्रामसभा आयोजित कर परियोजना को बंद करने के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इन प्रस्तावों की प्रतियां मांग पत्र के साथ संलग्न करने की बात कही गई है।
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कार्रवाई की मांग
समिति ने विधायक दशरथ गागराई से परियोजना को तत्काल बंद कराने, संबंधित भूमि को खाली कराने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। साथ ही, सीएनटी एक्ट, पेसा कानून और पेसा नियमावली के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कंपनी और ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
मांग पत्र की प्रतिलिपि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। समिति ने स्पष्ट किया है कि वह विकास और रोजगार के विरोध में नहीं है, लेकिन आदिवासी समुदाय की भूमि, ग्रामसभा के अधिकार, कृषि और पर्यावरण की कीमत पर औद्योगिक गतिविधियों का संचालन स्वीकार नहीं करेगी।
