23 अक्टूबर को मोरहाबादी में 3 हजार ग्राम सभाओं की महाआमसभा का ऐलान, ग्राम सभा मंच की बैठक में वनाधिकार, पेसा नियमावली और मुंडारी खुंटकट्टी गांवों की मान्यता का मुद्दा उठा, सरायकेला-खरसावां से 5 से 6 हजार प्रतिनिधियों के शामिल होने का लक्ष्य, पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचेंगे प्रतिनिधि
Kharsawan
खरसावां प्रखंड के नारायणबेड़ा स्थित घुमकुड़िया भवन में सोमवार को पारंपरिक जिला ग्राम सभा मंच, सरायकेला-खरसावां की विशेष बैठक आयोजित की गई। राज किशोर हंसदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न ग्राम सभाओं के अध्यक्षों के साथ मानकी-मुंडाओं ने भाग लिया। बैठक में वनाधिकार कानून, दलमा इको सेंसेटिव जोन, पेसा नियमावली, मुंडारी खुंटकट्टी गांवों की मान्यता समेत कई मुद्दों पर चर्चा कर आंदोलन की रणनीति तय की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 23 अक्टूबर को ग्राम सभा मंच झारखंड के नेतृत्व में रांची के मोरहाबादी मैदान में करीब तीन हजार ग्राम सभाओं की विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी। मंच का दावा है कि वनाधिकार कानून, 2006 लागू हुए दो दशक बीतने के बावजूद सामुदायिक वनाधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावों का विधिसम्मत तरीके से निपटारा नहीं हुआ है। मंच ने सरकार से ग्राम सभाओं को विधिसम्मत वनाधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की।

बैठक में दलमा वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसेटिव जोन से संबंधित 2012 की अधिसूचना को रद्द करने की मांग भी उठी। मंच के अनुसार इससे क्षेत्र के 136 गांवों में पक्की संरचनाओं के निर्माण को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। लोहरदगा के पेशरार प्रखंड के बड़ी गांव में असुर समुदाय के 81 परिवारों से जुड़े वनाधिकार के मामले को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई।
पेसा नियमावली में संशोधन की मांग
प्रतिनिधियों ने झारखंड में 2 जनवरी 2025 को बनाई गई पेसा नियमावली में संशोधन की मांग की। उनका कहना था कि नियमावली पेसा अधिनियम 1996 के अनुरूप तैयार होनी चाहिए। इसके अलावा मानकी-मुंडा व्यवस्था के लिए ठोस नियम बनाने, विलुप्त किए गए मुंडारी खुंटकट्टी गांवों को पुनः मान्यता देने तथा गैरमजरूआ परती जमीन पर खेती करने वाले किसानों को लगान निर्गत करने की मांग भी उठाई गई।
मंच ने तय किया कि 23 अक्टूबर को संबंधित विभागों को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री और राज्यपाल को आमसभा में आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई।
सरायकेला-खरसावां जिले से पांच से छह हजार प्रतिनिधियों को आमसभा में शामिल कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रतिनिधियों से कहा गया कि रांची जाने वाले वाहनों पर किसी राजनीतिक दल का झंडा-बैनर नहीं लगाया जाएगा। वाहनों पर ग्राम सभा के बैनर लगाए जाएंगे। प्रतिनिधि पारंपरिक वेशभूषा और गाजे-बाजे के साथ शामिल होंगे। ग्राम सभाओं से चंदा कर 6 अक्टूबर के बाद वाहनों की व्यवस्था करने की अपील की गई।
बैठक में बाबलू मुर्मू, दोलु सिंह सरदार, सुखराम मुंडा, अशोक मानकी, भरत सिंह मुंडा और सोहन लाल कुम्हार समेत अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
