खरसावां में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ का शुभारंभ
झारखंड के 16 जिले अभियान में शामिल, वैज्ञानिक तकनीक
से बढ़ेगा रेशम उत्पादन और किसानों की आय
Kharsawan
खरसावां स्थित अग्र परियोजना कार्यालय में बुधवार को केंद्रीय रेशम बोर्ड, बेंगलुरु के तत्वावधान में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से कच्चे रेशम एवं कोकून उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा झारखंड में रेशम उद्योग को नई दिशा देना है। कार्यक्रम के दौरान किसानों, वैज्ञानिकों एवं तसर उत्पादन विशेषज्ञों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित कर अभियान को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई। यह अभियान बुनियादी बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण केंद्र (बीएसएमटीसी), बुनियादी तसर रेशम बीज संगठन, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार, खरसावां तथा हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन कुचाई उप प्रमुख सुखदेव सरदार, बीस सूत्री अध्यक्ष अजय सामड, कच्चा बैंक चाईबासा के सहायक सचिव राममोहन प्रमाणिक, अग्र परियोजना पदाधिकारी नितीश कुमार तथा बीएसएमटीसी के वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मौके पर श्री कुमार ने कहा कि ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ अभियान को पिछले वर्ष देश के 100 जिलों में सफलतापूर्वक संचालित किया गया था। इसकी सफलता को देखते हुए चालू वित्तीय वर्ष में 22 जून 2026 से पूरे देश में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ शुरू किया गया है। झारखंड में इसका राज्यस्तरीय क्रियान्वयन 7 जुलाई 2026 को रांची में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से संयुक्त सचिव (तकनीकी) डॉ. रमेश बाबू (आईएफएस) द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अभियान के तहत देश के 228 जिलों का चयन किया गया है, जिनमें झारखंड के 16 जिले शामिल हैं। इनमें सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, चतरा, पलामू, खूंटी, लोहरदगा, गढ़वा, धनबाद, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहेबगंज, गिरिडीह और दुमका शामिल हैं। जबकि बीएसएमटीसी के वैज्ञानिक-बी प्रदीप गुलाबराव डुकरे ने कहा कि भारतीय रेशम अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में कोकून उत्पादन नहीं होने से रेशम उद्योग को मांग के अनुरूप कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके कारण देश को चीन और कोरिया जैसे देशों के सिल्क धागे पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0’ अभियान के माध्यम से गांव-गांव में किसानों को कोकून उत्पादन के प्रति जागरूक किया जाएगा। केंद्रीय सिल्क बोर्ड की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों को आधुनिक तकनीक, कोकून उत्पादन की वैज्ञानिक विधि, सरकारी योजनाओं एवं रेशम उत्पादन से होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी देंगी। इससे राज्य में कोकून उत्पादन बढ़ेगा, रेशम उद्योग को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बैठक में रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता, कौशल विकास, क्षमता निर्माण तथा रेशम उत्पादकों और किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर उदय मुर्मू, संतोष झा (टीडीएफ) सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, वैज्ञानिक एवं विभागीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
