खरसावां-कुचाई क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया रोजो पर्व
दोड़ी पोटा झूली थिली.., ओड़िया गीतों को गुनगुनाती हुई महिलाओं
और युवतियों ने रस्सी के सहारे बने झूले का लिया आनंद,
kharsawan-kuchai खरसावां-कुचाई क्षेत्रों में दोड़ी पोटा झूली थिली.., ओड़िया गीतों को गुनगुनाती हुई महिलाओं व युवतियों ने रस्सी के सहारे बने झूले का आनंद लिया। वहीं क्षेत्र में धूमधाम से शांतिपूर्वक रोजो पर्व मनाया गया। खरसावां, कुचाई, आमदा, बडाबाम्बों क्षेत्रों में रोजो पर्व पर पेड़ के तने में महिलाओं ने रस्सी के सहारे झूला बना कर झूला का आनंद लिया और रोजो पर्व के गीते भी गाये गये व घर में बने विभिन्न प्रकार के व्यंजन का आनंद उठाया। माना जाता है कि मासंत संक्रांति पर धरती माता को रजोस्राव होता है। इसके बाद धरती माता अपने गर्भ से अनाज पैदा करती है। रोजो पर्व के दिन खेतों में हल चलाने से लेकर किसी प्रकार के कृषि कार्य करना भी वजिर्त माना जाता है। इस दिन किसान सभी प्रकार के खेती के काम से अपने को अलग रखते हैं। रोजो पर्व के दिन सुबह से ही महिलाओं व बच्चों ने झूला का आनंद उठाया। ग्रामीण क्षेत्र में छऊ नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
April 25, 2026 8: 32 am
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