खुंटपानी के पांड्रासाली साइडिंग के विरोध में ग्रामीणों का धरना, बंद कराने की मांग, भूमि, खेती और पर्यावरण प्रभावित होने का लगाया आरोप, उपायुक्त के नाम सीओ को सौंपा मांग पत्र,
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खूंटपानी प्रखंड के पांड्रासाली स्टेशन से सटे क्षेत्र में रूंगटा कंपनी द्वारा संचालित साइडिंग में खनिज भंडारण एवं लोडिंग-अनलोडिंग गतिविधियों के विरोध में बुधवार को भूमि बचाओ संघर्ष समिति, खूंटपानी के बैनर तले ग्रामीणों ने एक दिवसीय धरना दिया। धरना के बाद उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम के नाम खुंटपानी अंचल अधिकारी फुलेश्वर साव के माध्यम से एक मांग पत्र सौंपकर साइडिंग की गतिविधियों को तत्काल बंद कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि साइडिंग में लौह अयस्क, 10:40 आयरन, कोयला, डोलोमाइट, क्लिंकर समेत अन्य खनिजों के भंडारण और लोडिंग-अनलोडिंग से आसपास के गांवों में धूल-कण का फैलाव बढ़ गया है। बारिश के दौरान साइडिंग क्षेत्र से बहकर आने वाले लाल, सफेद और काले रंग के गादयुक्त पानी से कृषि भूमि, फसल, तालाब और पशुओं के चारे के प्रभावित होने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की। ग्रामीणों का कहना है कि इससे खेती और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
समिति ने बताया कि साइडिंग शुरू होने के बाद क्षेत्र में दिन-रात भारी वाहनों का आवागमन बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में कई दुर्घटनाएं हुई हैं तथा मवेशियों की मौत भी हुई है। इसके अलावा पांड्रासाली चौक के होटलों में तैयार खाद्य सामग्री पर भी धूल जमने की शिकायत की गई है। मांग पत्र में कहा गया है कि साइडिंग से मटकोबेड़ा, दोरलोर, उनचुडी, सनचीरू, खुन्टा, पताहातु, तोरसिंदुरी, केंदुलोटा, कुम्हारलोटा, ऊपरलोटा, पांड्रासाली और उलीराजाबासा समेत कई गांव प्रभावित हैं। समिति के अनुसार करीब पांच हजार एकड़ जमीन और लगभग दस हजार ग्रामीण इसके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव में आ सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है और साइडिंग की स्थापना से पहले संबंधित ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई। उन्होंने सीएनटी एक्ट, पेसा अधिनियम और पेसा नियमावली-2025 के प्रावधानों का पालन किए जाने की मांग की। साथ ही संबंधित ग्राम सभाओं द्वारा साइडिंग बंद कराने के लिए पारित प्रस्तावों का हवाला देते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास और रोजगार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन कृषि भूमि, ग्रामसभा के अधिकार, पर्यावरण और ग्रामीणों की आजीविका की कीमत पर औद्योगिक गतिविधियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। धरना में मंझारी के जिप सदस्य माधव चंद्र कुंकल, खूंटपानी जिप सदस्य यमुना तियू, प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा, विधायक प्रतिनिधि दुर्गा चरण पाड़ेया, बड़ा चिरू मुखिया नरेंद्र बानरा, डिम्बु तियू, बिरसा तियू, विजय बानरा, सुखलाल पुर्ती, उदय मुंडरी, रेयांस सामड समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
