खरसावां मे आदिवासी दिवस पर दिखी झारखंडी संस्कृति की झलक,
पारंपरिक वेशभूषा में निकली जागरूकता रैली, शहीदों को दी श्रद्धांजलि,भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखना भी जरूरी है-बीडीओ
Kharsawan
खरसावां में विश्व आदिवासी दिवस पारंपरिक रीति रिवाज के तहत मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासी समन्वय समिति के बैनर तले पारंपरिक तरीके से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान खरसावां कला सांस्कृतिक भवन से पारंपरिक वेशभूषा में जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक परिधान के साथ निकली रैली ने खरसावां की सड़कों पर झारखंडी संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। रैली खरसावां चांदनी चौक होते हुए शहीद पार्क पहुंची, जहां खरसावां के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद रैली पुनः खरसावां कला सांस्कृतिक भवन पहुंचकर संपन्न हुई। महिलाओं ने पारंपरिक लाल-हरा पाड़ साड़ी तथा पुरुषों ने पारंपरिक धोती पहनकर हिस्सा लिया।

पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान का संदेश दिया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और नशामुक्ति को लेकर किया जागरूक।
जागरूकता रैली के माध्यम से समाज में शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ नशामुक्ति, सामाजिक अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों का संदेश दिया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी ने कहा कि आधुनिक दौर में विकास के साथ अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने तथा समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी है। इसके साथ ही अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति शिक्षा और जागरूकता से ही संभव है।
शहीदों को नमन कर संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प
रैली के दौरान शहीद पार्क में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर उनके बलिदान को याद किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य झिगी हेंब्रम, मनोज कुमार सोय, डेविड कुजूर, सावित्री कुदादा, चांद्रमनी सोय, रामलाल हेंब्रम, मंगल दिगी, लाल सिंह सोय, सुकराम सोय, मंगल सिंह जामुदा समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।
