कुचाई में धूमधाम से मना विश्व आदिवासी दिवस, संस्कृति और स्वशासन के संरक्षण का लिया संकल्प,आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति है-गागराई
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कुचाई स्थित बिरसा स्टेडियम में रविवार को विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों, मानकी-मुंडा संघ एवं ग्राम सभा मंच के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा, भाषा, शिक्षा और रूढ़िगत स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित एवं मजबूत करने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्री गागराई ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी है। इन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आदिवासी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के साथ बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। श्री गागराई ने कहा कि मानकी-मुंडा व्यवस्था और ग्राम सभा आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन प्रणाली की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसके माध्यम से समाज में आपसी सहयोग, सामाजिक अनुशासन और सामुदायिक निर्णय की परंपरा मजबूत होती है। उन्होंने रूढ़िगत स्वशासन व्यवस्था को और सशक्त बनाने तथा आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक एकता बनाए रखने और युवाओं को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक शिक्षा और विकास के साथ अपनी जड़ों, भाषा और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना भी जरूरी है। इस अवसर पर मुख्य रूप से खरसावां विधायक दशरथ गागराई, समाजसेवी बांसती गागराई सहित विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, मानकी-मुंडा संघ के सदस्य, ग्राम सभा प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
