छऊ कलाकारों का सम्मान सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान : मनोज चौधरी
राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कलाकारों का नगर पंचायत कार्यालय में हुआ अभिनंदन
Seraikella
सरायकेला, 11 जून। सरायकेला की गौरवशाली छऊ परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित छऊ मुखौटा शिल्पकार एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र तथा युवा छऊ कलाकार कुना सामल के सम्मान में गुरुवार को नगर पंचायत अध्यक्ष कार्यालय में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने दोनों कलाकारों को शॉल एवं सम्मान प्रतीक भेंट कर सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मनोज चौधरी ने कहा कि सुशांत कुमार महापात्र को वर्ष 2025 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा युवा कलाकार कुना सामल का उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए चयन सरायकेला, झारखंड और संपूर्ण छऊ कला जगत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल दो कलाकारों की उपलब्धि नहीं, बल्कि सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और छऊ कला की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि कलाकारों के सम्मान, उनकी समस्याओं के समाधान तथा राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कला परंपरा के संरक्षण के लिए कलाकारों को सम्मानजनक जीवन और संस्थागत सहयोग मिलना आवश्यक है।
मनोज चौधरी ने बताया कि झारखंड सरकार के सहयोग से राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र में प्रशिक्षकों एवं कलाकारों की नियुक्ति, बहुउद्देशीय कला भवन का निर्माण, कलाकार पेंशन योजना समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंतिम चरण में हैं। इनके लागू होने से सरायकेला छऊ के विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कलाकारों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि सरायकेला छऊ केवल एक कला नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और विरासत है। सभी कलाकार, गुरुजन और सांस्कृतिक संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो सरायकेला छऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाई जा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला मोहन्ती ने किया। उन्होंने सम्मानित कलाकारों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे सम्मान नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और छऊ कला के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा प्रदान करते हैं।
समारोह में पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ छऊ गुरु शशधर आचार्य, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तपन पटनायक एवं बजेन्द्र पटनायक, वरिष्ठ फेलोशिप प्राप्त मनोरंजन साहू, काशीनाथ कर, रूपेश साहू, राकेश कवि, छऊ शोधकर्ता अमलेश सिन्हा सहित बड़ी संख्या में कलाकार, गुरुजन, कला प्रेमी एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित थे।
वक्ताओं ने कहा कि सरायकेला छऊ केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। राष्ट्रीय स्तर पर कलाकारों को मिल रहे सम्मान यह साबित करते हैं कि सरायकेला की छऊ परंपरा अपनी मौलिकता और कलात्मक उत्कृष्टता के कारण देश-दुनिया में विशिष्ट स्थान रखती है।
