कुकडू मे हाथी ने पलाशडीह गांव में घर को किया क्षतिग्रस्त,रात भर ग्रामीणों ने की मशाल और लाईट लेकर पहरेदारी*
Kukdu कुकड़ु: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कुकड़ू प्रखण्ड के जानूम पंचायत के पलाशडीह गांव में बीते रात्रि भोजन की तलाश में हाथीयों ने जमकर उत्पात मचाया।वहीं विशेष सूत्र ने जानकारी देते हुए कहा कि झुंड से बिछड़ा एक हाथी ने रात को गांव में उपद्रव मचाते हुए रबी महतो की घर को तोड़कर उसके घर के मिट्टी का दिवाल को क्षतिग्रस्त किया साथ ही घर में रखे अनाज को अपना निवाला बनाया। इस तरह श्यामचंद महतो गांव जानूम पंचायत के अंतर्गत पलाशडीह गांव के मिट्टी का घर के दिवाल को तोड़ा एवं छोटा दुकान को भी क्षतिग्रस्त किया परिवार के साथ रात्रि में सोए हुए थे तभी अचानक से उनका घर के खपड़े टूटने की आवाज आई और कुछ क्षण बाद दिवाल गिर गया जिसके गिरने से परिवार के सदस्य बाल बाल बच गए,जिसके बाद दूसरे घरों में भागकर आपने और परिवार की जान बचाया। इस तरह से मिट्टी का बने दीवार को विशाल हाथी ने तोड़ डाला । दीवार गिरने के बाद घर में मौजूद लोगों ने भागकर जान बचायी नही तो दीवार से दब जाने से कुछ भी अनहोनी घटना घट सकती थी।साथ में घरेलू सामग्री को भी क्षति पहुंचाया। ग्रामीण मंगल चंद्र महतो ने जानकारी देते हुए कहा कि घटना रात के 2 बजे की है,उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के द्वारा अपने और परिवार की सुरक्षा के लिए,मशाल ,लाइट,टॉर्च,फटाके की प्रयोग करके हाथी भगाने का कोशिश किया गया । उन्होंने आगे कहा कि आखिर कबतक ग्रामीण करते रहेंगे खुद से बचाओ,जहां हर साल लाखों रूपया सरकार हाथी से बचाओ हेतु खर्चा करती है,परन्तु अभी भी उचित व्यवस्था नहीं ही पाई है।इस तरह का भयावह स्थिति रहने से गरीब किसान अपना जमीन पर खेती करना छोड़ देंगे।ग्रामीण बताते है की हमारे खेत की कोई भी फसल तो सुरक्षित है ही नहीं। आज हाथी हमारे घर घुसके तोड़ फोड़ कर रहे है आखिर हमलोग जायेंगे कहां इसकी उचित व्यवस्था कर संबंधित विभाग को हाथी को जंगल भागा देना चाहिए।जिससे आगे की होने वाली क्षति से बचा जा सके।
आखिर कहा से पहुंच जाते हैं हाथी
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी चांडिल और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के बाघमुंडी अयोध्या पहाड़ से इन गांवों मे हाथी के झुंड यहां पहुंचते हैं और ईचागढ़ विधान सभा क्षेत्र में आतंक और दहशत मचाते है। हाथी दिन के उजाले में गांव में प्रवेश कर जाते हैं ओर उपद्रव मचाते हैं।केंद्र सरकार ओर राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया वन एवं पर्यावरण विभाग को मुहैया कराया जाता है । जंगल में पोष्टिक भोजन और पानी की तलाश में सेंचुरी छोड़कर वन्य जीवजंतु गांव के आसपास छोटे बड़े जंगल में डेरा डाला हुए है।
चांडिल वन क्षेत्र के अधीन नीमडीह व ईचागढ़ थाना अंतर्गत दर्जनों गांव हाथी प्रभावित क्षेत्र बन गया है। जहां लगभग बारहों महीना हाथी की झुंड गांव के आसपास जंगल में डेरा डाले हुए है ।वन विभाग द्वारा आस पास के गांव को अबतक एलिफेंट जोन घोषित नही किया गया है न ही चिन्हित किया गया।जहां हाथी की झुंड विचरण करते रहते हैं। लाखों रूपए दलमा आश्रयनी में हाथियों का सुरक्षा व विकास के नाम पर फंड मिलता है।आज तक न ही हाथी संरक्षण के लिए मुलभूत सुविधा उपलब्ध कराई गई है और न ही जंगल को बचाने में कामयाब है ,जिससे हाथियों का भटकाव हो रहा है।उचित उपाय कर ही इस विकट परिस्थितिय को टाला जा सकता है,विभाग को इस पर विशेष संज्ञान लेना चाहिए और जरूरत पड़ने पर हाथी भगाने के लिए ग्रामस्तरीय टीम गठित करना चाहिए। ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लगभग लोग किसान वर्ग से ही आते है तथा कृषि कार्य से ही अपना निर्वहन करते है।
