खरसावां में आदिम कुम्हार महासंघ की बैठक, सुखदेव
को सरायकेला एवं सोनाराम को पश्चिमी सिंहभूम के बने जिलाध्यक्ष,
जाति सूची में “कुम्हार” को यथावत शामिल करने की मांग,
Kharsawan
खरसावां पथ निरीक्षण भवन में आदिम कुम्हार महासंघ झारखंड की एक महत्वपूर्ण बैठक केन्द्रीय अध्यक्ष सुधीर कुम्हार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें समाज के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में सर्वसम्मति से शंशाक भकत को आदिम कुम्हार महासंघ झारखंड की केन्द्रीय उपाध्यक्ष, सुखदेव कुम्हार को सरायकेला खरसावां जिले का जिलाध्यक्ष एवं सोनाराम कुम्हार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के जिलाध्यक्ष, शरद कुम्हार को सरायकेला खरसावां जिले के कोषाध्यक्ष, दीनबंधु कुम्हार को गम्हारिया के प्रखंड अध्यक्ष, आंनद भकत को प्रखंड सचिव, शंम्भू कुम्हार को सरायकेला का प्रखंड अध्यक्ष, कोन्दो कुम्हार को खरसावां प्रखंड अध्यक्ष तथा राम चरण कुम्हार को कुचाई प्रखंड अध्यक्ष मनोनीत किया गया। बैठक में कुम्हार समाज की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा झारखंड सरकार के समक्ष 13 सूत्री मांगें रखने का निर्णय लिया गया।

जिसमें मुख्य रूप से वर्ष 1956 की सूची में कुम्हार शब्द में हुई त्रुटि को सुधारते हुए जाति सूची में “कुम्हार” शब्द को यथावत शामिल करने की मांग शामिल है। मौके पर केन्द्रीय अध्यक्ष सुधीर कुम्हार ने कहा कि कुम्हार जाति से तरह तरह के उधोग छीन लिया गया है। जिससे बेघर और बेसहारा बन गए है। हमारे बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त नही कर पा रहे है। हम सरकारी सुविधाओं से वंचित है। हम्मे सरकारी सुविधा चाहिए। आज तक माटिकला बोर्ड को गठन नही हुआ है। पिछले सरकार ने दिया था। हम्मे नही मिला है। जिससे कारण आन्दोलन करने का बाध्य है। जबकि सत्येन्द्र कुम्हार ने कहा कि कुम्हार समाज पारंपरिक रूप से मिट्टी शिल्प और माटी कला से जुड़ा रहा है, लेकिन बदलते समय में इस पेशे से जुड़े लोगों को पर्याप्त सरकारी सहयोग नहीं मिल पा रहा है, जिससे समाज आर्थिक रूप से पिछड़ता जा रहा है। उन्होने कहा कि कुम्हार जाति की स्थिति बहुत ही दयनीय है। सरकार सहित कोई भी संस्था कुम्हार समाज के लिए नही सोचती है। हमारे पेशा को छीन लिया गया है। सरकार हमारे पेशा को पुनर्जीवित करे और हमारे बच्चों को सरकारी सहयोग देकर उच्च शिक्षा प्रदान किया जाए।यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं करती है तो महासंघ चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा। इस दौरान मुख्य रूप से आदिम कुम्हार महासंघ झारखंड के केन्द्रीय अध्यक्ष सुधीर कुम्हार, सलाहकार डॉ सरोज कुम्हार चौधरी, सुखदेव कुम्हार, सोनाराम कुम्हार, सत्येन्द्र कुम्हार, कोन्दो कुम्हार, बुधलाल कुम्हार, छोटेलाल कुम्हार, रथो कुम्हार, मंगल कुम्हार, विरेन्द्र कुम्हार, जोगा कुम्हार आदि उपस्थित थे।
आदिम कुम्हार महासंघ की मुख्य मागें
आदिम कुम्हार महासंघ ने झारखंड सरकार से वर्ष 1956 की सूची में कुम्हार शब्द में हुई त्रुटि को सुधारते हुए जाति सूची में “कुम्हार” शब्द को यथावत शामिल करने, कुम्हार समाज को माटिकला बोर्ड में समुचित सदस्यता और प्रतिनिधित्व देने, भूमिहीन कुम्हार परिवारों को आवास निर्माण हेतु निःशुल्क सरकारी जमीन उपलब्ध कराने, मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष सहायता देकर उच्च प्रशासनिक सेवाओं में जाने का अवसर प्रदान करने, समाज से विधायक-सांसद न बनने की स्थिति को देखते हुए कम से कम प्रतिनिधि के रूप में नामांकन सुनिश्चित करने, मिट्टी शिल्प से जुड़े कुम्हारों को उपयुक्त मिट्टी, भट्ठा (पाकशाला) निर्माण हेतु जमीन एवं जलावन की व्यवस्था करने, ईंट, टाइल्स, एस्बेस्टस शीट आदि निर्माण के लिए लाइसेंस प्रदान करने की प्रक्रिया सरल करने, मिट्टी निर्मित वस्तुओं की बिक्री के लिए विशेष बाजार एवं स्टॉल की व्यवस्था करने, प्रत्येक कुम्हार परिवार को 40 प्रतिशत अनुदान के साथ 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण-आर्थिक सहायता देने, प्रवीण कुम्हार शिल्पियों को पांच हजार का मासिक पेंशन देने, राज्य सरकार के विभागों में कुम्हार युवक-युवतियों को नौकरी में अग्राधिकार साथ आरक्षण देने, सभी जिला मुख्यालयों में 40-40 डिसमिल जमीन पर दो-दो हजार वर्ग फीट का “माटी कला भवन” बनाने तथा अध्ययनशील छात्रों के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालयों में 50-50 बेड का छात्रावास निर्माण कराने की मांग की है।
