राजमहल में छऊ की तीनों शैलियों का दिखा संगम,
राजकीय माघी पूर्णिमा मेला में खरसावां, सरायकेला और मानभूम
के तीन प्रख्यात छऊ नृत्य शैलियों का भव्य प्रदर्शन,
खरसावां
झारखंड के राजमहल में साहेबगंज जिला प्रशासन द्वारा राजकीय माघी पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित झारखंड आदिवासी महाकुंभ में जिले के तीन प्रख्यात छऊ नृत्य शैलियों का भव्य प्रदर्शन किया गया। संगीत नाटक अकादमी अवॉर्डी गुरु तपन कुमार पटनायक के नेतृत्व में सरायकेला के संसार के पालनहार हर पार्वती, जीवन के संघर्ष के प्रतीक नाविक, शाश्वत प्रेम के द्योतक राधा कृष्ण और राष्ट्र प्रेम की पहचान पताका नृत्य, खरसावां के माया बंधन और शिकारी जबकि मानभूम के महिषासुर मर्दीनी और ताड़का वध नृत्य की भव्य प्रस्तुति हुई।

राजमहल में छऊ की भव्य प्रस्तुति पर गुरु तपन कुमार पटनायक एवं उनके सहयोगियों को अनुमंडल पदाधिकारी सदानंद महतो ने शाल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व निदेशक गुरु तपन कुमार पटनायक ने कहा कि झारखंड का सरायकेला खरसावां जिला छऊ नृत्य की तीनों शैलियों की जननी रही है।

इस क्षेत्र की कलाएं आज विश्व में अपना पताका फहरा चुकी है। उन्होंने राजमहल में छऊ की तीनों शैलियों के संगम पर अनुमंडल पदाधिकारी श्री सदा नन्द महतो की प्रशंसा करते हुए कहा कि झारखंड के विश्व प्रसिद्ध तीन छऊ शैलियों को एक मंच में लाकर स्थानीय कला से क्षेत्र की जनता को रुबरु किया।

इस कार्यक्रम में खरसावां शैली छऊ के मो0 दिलदार और बसन्त कुमार गनतायत मानभूम के गुरु लक्ष्मण महतो सहित वरिष्ठ कलाकार गोपाल कुमार पटनायक राजतेंदु रथ निवारण महतो बैसागु सरदार, विजेंद्र सरदार, कुसुमी पटनायक, सूरज हेंब्रम, सुदीप घोडाई, कमल महतो, एंजेल केशरी, चांदनी हेंब्रम सहित 45 कलाकार उपस्थित थे।
