सरायकेला के महालिमोरूप की असहाय विकलांग विधवा पद्मावती मल्हा सरकारी योजनाओं से वंचित, भीख मांगने को विवश*
Kharsawan
सरायकेला प्रखण्ड अन्तर्गत महालिमोरूप से एक गंभीर मामला सामने आया है। मामला यह है कि एक गरीब विकलांग विधवा महिला पद्मावती मल्हा केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से वंचित है।
बता दें कि उनका कोई अपना आवास नहीं है। वह मजबूरन महालिमोरूप में अकेली एक टूटी फूटी झोपड़ी में रहती हैं। उसके पति स्वर्गीय मनोज लोहार के आकस्मिक देहांत के बाद पद्मावती असहाय हो गई हैं। उसका दोनों पांव अपंग होने की वजह से उन्हें चलने फिरने में भी भारी दिक्कत होती है। उसके पास ट्राई साईकिल भी नहीं है जिसके सहारे चलना फिरना कर सकें।
वह गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है, इसके बावजूद उनका राशन कार्ड तक नहीं बना है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण खाद्यान्न योजना, आवास योजना, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ भी उन्हें अब तक नहीं मिल पाया है। हालात ऐसे हैं कि पेट भरने के लिए उन्हें भीख मांगने को विवश होना पड़ रहा है।
एक मुलाकात में पद्मावती मल्हा ने बताया, “सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित सरकारी कार्यालय के कई चक्कर लगा चुकी हूँ। लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली।” फिर भी वह मदद की आस लगाए बैठी हैं।
इस मामले की जानकारी जब स्थानीय युवा सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान को मिली , तो उन्होंने विकलांग विधवा पद्मा मल्हा की हाल चाल जानने के लिए उसके पास पहुँचा। उसकी दैयनीय स्थिति को देखकर उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है। एक विकलांग विधवा का राशन कार्ड तक न बनना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर पद्मावती मल्हा को राशन कार्ड, पेंशन और आवास योजना का लाभ दिलाना चाहिए।
