वृहद झारखण्ड मोर्चा ने नई शिक्षा नीति उठाए
सवाल, केन्द्र सरकार और राज्य सरकार देश के सभी सरकारी
स्कूलों को कमजोर एवं बंद करना चाहते हैं-बिरसा सोय
kharsawan
वृहद झारखण्ड मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बिरसा सोय ने नई शिक्षा नीति सवाल उठते हुए कहा कि देश की जनता जहां निजीकरण का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। वहीं सरकार देश में शिक्षा का स्तर को और नीचे ले जाना चाहती है और देश के गरीबों के बच्चे पढ़ने वाले सरकारी स्कूलों को बंद करके निजी हाथों में बेचना चाहतें हैं। इसी कड़ी में सरकार ने अपना पहला प्रयोग शुरू करते हुए नई शिक्षा नीति 2020 भारत की शिक्षा नीति है। जिसे भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया। उन्होंने कहा कि सन 1986 में जारी हुई नई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। जबकि इतनी कठिन परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर कोई शिक्षक बनता है। उसके ऊपर एनजीओ को थोपना बहुत ही गलत है। इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। श्री सोय ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती आरटीई नियमों के तहत की जाती है। बीटीसी, डीएलएड, बीएड आदि करने के बाद टीईटी, सीटीईटी और फिर शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद कोई शिक्षक बनता है। एनजीओ में पढ़ाने वालों की क्या शैक्षणिक योग्यता है, किसी को पता नहीं। बेसिक शिक्षा विभाग में हर प्रकार से योग्य ,प्रशिक्षित एवं पर्याप्त शिक्षक हैं तो विभाग द्वारा धन भुगतान कर एनजीओ से क्यों व क्या उम्मीद करके कार्य लिया जाता है। यदि एनजीओ के कर्मचारी इतने ही योग्य हैं तो परीक्षा पास कर अध्यापक क्यों नहीं बन गए। सरकारी स्कूलों के बच्चे शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में नामांकन ले सकते हैं। आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) के अनुसार, निजी स्कूलों को अपनी प्रवेश कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) और वंचित समूहों (डीजी) के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। तो फिर आज झारखंड अलग राज्य बनने के 24 साल के बाद भी सरकारी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई क्या हमारे नेता मंत्री के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। जिसका सज्जा गरीबों को दी जा रही है। ताकि गरीबों के बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो जाए। हमारे देश के नेताओं को सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर कोई विश्वाश है ही नहीं इसीलिए वे अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं और देश के आम जनता को ज्ञान बांटते हैं। जबकि उनके पूर्वज यही सरकारी स्कूलों में पढ़ के देश को दिशा देने का कार्य किया था। लेकिन आज पूंजीपतियों के हाथों देश की शिक्षा नीति को बेचना चाहते हैं। श्री सोय ने कहा कि सरकारी स्कूलों को ठीक किए बिना समाज और देश की तरक्की नहीं हो सकती है। क्योंकि इसी सरकारी स्कूल में देश के गरीब व माध्यम वर्ग परिवार के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में हमें सरकारी स्कूलों को ठीक करना हमारा पहला कर्तव्य है।
April 24, 2026 4: 24 am
Breaking
- सरायकेला में खेल सुविधाओं का विस्तार, नए कोर्ट और “खेल बैंक” का हुआ शुभारंभ
- खरसावां में कुड़मालि साहित्यकार लक्ष्मीकांत मुतरुआर की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई, वे केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि उनका योगदान समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा-सुनील,
- सरायकेला एसडीओ ने कुचाई कल्याण अस्पताल का किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी, मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने का दिया निर्देश,
- कुचाई के बिरहोर गांव जोड़ासारजम में “सुजल स्वच्छ संवाद” कार्यक्रम संर्पन्न, प्रत्येक ग्रामीणो को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता- उपायुक्त
- जिले के विभिन्न गांवो में डायन प्रथा पर नुक्कड़ नाटक कर लोगों को किया जागरूक, यदि कोई बीमारी को डायन प्रथा से जोड़ता है तो यह महज अंधविश्वास है, इससे दूर रहने की अपील,
- जयपुर और बाघमुण्डी के जनता अपना भविष्य के लिए वोट करें- जयराम महतो *जयपुर- बाघमुण्डी की जनता टीएमसी- बीजेपी के जंगल राज और डर राज को एक साथ अलविदा कहने को तैयार- देवेन्द्र नाथ महतो ।*
- सरायकेला-खरसावां की नई एसपी निधि द्विवेदी से AISMJWA प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार मुलाकात
- आयुष ग्राम रघुनाथपुर में स्वास्थ्य शिविर आयोजित, 41 ग्रामीणों की निःशुल्क जांच एवं होमियोपैथी औषधि वितरण…*
