सरायकेला-खरसावां मॉडल कॉलेज के प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, छात्रों ने प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, प्रोफेसर नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लेते और छात्रों के साथ करते है भेदभावपूर्ण व्यवहार
Kharsawan
सरायकेला-खरसावां स्थित मॉडल महाविद्यालय के छात्रों ने इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर प्रो0 पंकज श्रीवास्तव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए प्राचार्य को लिखित शिकायत सौंपी है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि संबंधित प्रोफेसर पंकज श्रीवास्तव नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लेते हैं और छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं। प्राचार्य को दिए गए आवेदन में छात्रों ने बताया कि इतिहास विभाग के प्रोफेसर द्वारा अक्सर कक्षाएं नहीं ली जाती हैं, जिससे उनकी पढाई प्रभावित हो रही है। जब छात्र कक्षा लेने का अनुरोध करते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। छात्रों का यह भी आरोप है कि प्रोफेसर द्वारा क्षेत्रवाद और भेदभाव से जुडी बातें कही जाती हैं, जिससे उनका मनोबल प्रभावित होता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विरोध करने पर छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन में फेल करने की धमकी दी जाती है। छात्रों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे कॉलेज का शैक्षणिक माहौल खराब हो रहा है और उनकी उपस्थिति पर भी असर पड रहा है। बिहार और यूपी के बच्चे पढने लिखने में तेज होते है इसिलिए उन्हे पढाने में भी मजा आता है और तुमलोगों के यहाँ झारखण्ड कि शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खत्म है, पढ लिखकर किया करोगें। क्षेत्रवाद की इस तरह के बातो का जब हमलोग विरोध करते है और कहते है कि प्राचार्य से आपकी शिकायत करेगें तो हमलोगो को धमकी दिया जाता है कि ज्यादा बोलोगे तो तुमलोगों का परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन में अनुत्तीर्ण कर देगें। साथ ही ये कहते है कि तुमलोग आराम से रहो शिकायत की आवश्यकता नहीं है महाविद्यालय की तरफ से किसी भी विद्यार्थीयों को किसी तरह की कोई समस्या नही होगी। छात्रो ने कहा कि हम झारखण्डी लोग गरीब, बंचित, शोषित, जनजाति परिवार से आते है साथ ही महाविद्यालय से 15 से 20 किमी की दूरी तय करके हमलोग यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते है। ताकि हमारे गाँव, घर और समाज कि दिशा और दशा बदल सके। दुख तो उस बात का है कि सरकार हमे पढाने के लिए इन्हे वेतन देता है। परंतु पढाना तो दूर की बात है वह तो यहाँ क्षेत्रवाद का भी जहर घोल रहे है। इस तरह के शिक्षक क्षेत्र और समाज के लिए घातक है। इनके इस व्यवहार के लिए महाविद्यालय में विद्यार्थीयों की उपस्थित अब न के बराबर हो गई है। छात्रों ने प्राचार्य से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसकी प्रतिलिपि कुलपति रांची, जनजातीय आयोग भारत सरकार डाॅ आशा लकडा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं खरसावां विधायक दशरथ गागराई को दी गई।
