ऐतिहासिक रथयात्रा को मिलेगा स्थायी संरक्षण: चंपई सोरेन ने किया बड़ा ऐलान
रथ निर्माण स्थल पर पहुंचकर तैयारियों का लिया जायजा, बोले- सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान है रथयात्रा; रथ आसन भवन बनेगा, 16 जुलाई को स्वयं खींचेंगे रथ
Seraikella
सरायकेला। तीन शताब्दियों से भी अधिक समय से चली आ रही सरायकेला की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष एक नई सौगात के साथ आयोजित होने जा रही है। सोमवार शाम पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक चंपई सोरेन रथ निर्माण स्थल पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के रथ निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने कारीगरों से मुलाकात कर निर्माण की प्रगति जानी तथा श्री जगन्नाथ सेवा समिति के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर तैयारियों की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान चंपई सोरेन ने कहा कि सरायकेला की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कारीगरों से परंपरा और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए रथ निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने का आग्रह किया।
इस दौरान समिति के आग्रह पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि भविष्य में रथ को हर वर्ष खोलकर सुरक्षित रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए एक स्थायी रथ आसन भवन का निर्माण कराया जाएगा, जहां रथ को संरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ रथ निर्माण प्रक्रिया को भी सुगम बनाएगी।
श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित रथ महोत्सव के अंतर्गत 14 जुलाई को नेत्रोत्सव एवं 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। परंपरा के अनुसार सरायकेला राजपरिवार के गजपति राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव छेरा-पोंहरा की रस्म निभाएंगे, जिसके बाद श्रद्धालु रथ को खींचेंगे।
चंपई सोरेन भी रथयात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर श्रद्धालुओं के साथ रथ खींचेंगे। मौके पर श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष लिपू मोहंती, विधायक प्रतिनिधि सनंद आचार्य, बद्री नारायण दारोगा, विजय दत्त, राजकुमार सिंह, दुखु साहु सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। क्षेत्र की पहचान बन चुकी यह ऐतिहासिक रथयात्रा एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का भव्य संदेश देने को तैयार है।
