सरायकेला के सरहुल-बाहा बोंगा मिलन समारोंह में
दिखा आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक, मांदर-नगाड़ों की
थाप पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को किया मंत्रमुग्ध,
seraikella
सरायकेला-खरसावां जिले के पुलिस केंद्र (पुलिस लाइन) दुगनी में आदिवासी संस्कृति और परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से सरहुल-बाहा बोंगा मिलन समारोह का आयोजन धूमधाम से किया गया। सरहुल (ब्ह-बाहा बोंगा) पूजा समिति एवं पुलिस परिवार सरायकेला खरसावां के द्वारा आयोजित सरहुल-बाहा बोंगा मिलन समारोंह में खरसावां विधायक दशरथ गागराई, जिला पुलिस कप्तान मुकेश कुमार लुणायत, एसडीपीओ समीर कुमार सवैया, समाजसेवी बासंती गागराई, पुलिसकर्मियों, उनके परिवारों और स्थानीय आदिवासियों ने भाग लिया, जहां पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-नगाड़े) और पूजा-अर्चना के साथ आपसी भाईचारा, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति आस्था का संदेश दिया। साथ ही की सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उन्नति की कामना की।

इसके बाद पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों ने मांदर-नगाड़ों की थाप पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूजा-अर्चना के दौरान प्रकृति, पेड़-पौधों और जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह उत्साह और उल्लास से भरा रहा, जहां आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरहुल और बाहा जैसे पर्व आदिवासी समाज की पहचान हैं, जो हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की सीख देते हैं।

“प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है-गागराई
खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि “प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है। प्रकृति जब सुरक्षित रहेगी तब हमारा अस्तित्व भी रहेगा। आज के भौतिकवादी युग में आपा-धापी के बीच जीवनयापन हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दीर्घकालीन सोच के साथ कुछ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं जिसके तहत हम लोग एक साथ एक मंडप में एक छत के नीचे, एक पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम सभी लोग प्रकृति की रक्षा करें और अपने जीवन को सुरक्षित करें।

प्रकृति के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था-एसपी
सरायकेला खरसावां जिला पुलिस कप्तान मुकेश कुमार लुणायत ने कहा कि “प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि “अगर प्रकृति नहीं होता तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अगर प्रकृति ना होती तो संसार में कोई जीव-जंतु भी नहीं होती। ये सभी प्रकृति के द्वारा रचाई और बसाई गई व्यवस्था है और इस व्यवस्था के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था है।
ये थै मौजूद
खरसावां विधायक दशरथ गागराई, जिला पुलिस कप्तान मुकेश कुमार लुणायत, एसडीपीओ समीर कुमार सवैया, समाजसेवी बासंती गागराई, रानी हेम्बम, मनोज सोय, पुलिसकर्मियों, उनके परिवारों और स्थानीय आदिवासी मौजूद थे।
