कोल्हान के सारंडा के बीहड़ों में गूंजा विकास का सवाल,
कोल्हान रक्षा संघ ने खोली जमीनी हकीकत, ग्रामीणों ने लगाया
आरोप दुर्गम क्षेत्रों में आने से कतराते है सरकारी महकमा
Kolhan
कोल्हान क्षेत्र के दूरस्थ और वनाच्छादित इलाकों में विकास की वास्तविक स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोल्हान रक्षा संघ द्वारा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा के बीहड़ जंगल स्थित नोवामुड़ी प्रखंड के पोखरिया गांव में आयोजित बैठक में आदिवासी समुदाय की मूलभूत समस्याएं खुलकर सामने आईं। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डिबार जोंकों ने की, जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण अपने पारंपरिक मुखिया, मुंडा, मानकी और अन्य प्रतिनिधियों के साथ शामिल हुए। बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इस दुर्गम क्षेत्र तक पहुंचने से कतराते हैं, जिससे बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह प्रभावित हैं। लोगों ने बताया कि क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में होने के बावजूद राजस्व गांवों को आज तक वन पट्टा नहीं मिला है, जो उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों ने पोषाहार केंद्रों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए। हजारों की संख्या में मौजूद पुरुष, महिलाएं और बच्चों में कुपोषण साफ झलक रहा था। लोगों का कहना था कि बच्चों और महिलाओं को नियमित पोषाहार नहीं मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। सारंडा के पोखरिया गांव में आयोजित यह बैठक विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए।

योजनाओं की जमीनी सच्चाई उजागर
बैठक में मैया सम्मान योजना की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। उपस्थित लगभग 300 महिलाओं में से केवल एक महिला को ही इस योजना का लाभ मिल पाया था। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं वृद्धावस्था पेंशन योजना भी कई महीनों से बंद बताई गई। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी आजीविका का मुख्य साधन जंगल से मिलने वाले उत्पाद जैसे पत्ते, दातून और लकड़ी बेचकर जीवन यापन करना है। लेकिन वन विभाग की सख्ती के कारण कई बार उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति
पोखरिया गांव में शिक्षा व्यवस्था की हालत भी बेहद खराब है। यहां एकमात्र विद्यालय एक पारा शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
औसत आयु और कुपोषण पर चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में औसत आयु काफी कम है। बैठक में मौजूद हजारों लोगों में 48 वर्ष से अधिक उम्र के केवल 12 लोग ही मिले, जिससे कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की गंभीरता उजागर होती है।
ये थै मौजूद
कोल्हान रक्षा संघ अध्यक्ष डिबार जोंकों, मानसिंह हेंब्रम, रविंद्र मंडल, जयसिंह हेंब्रम, पूनम मेम्बरम, शिवानंद किस्कू, सुमित्रा जोंकों, मंगल सिंह लागुरी, राउतु गागराई सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
