खरसावां के विभिन्न गांवो में मां मंगला उषा पर पारंपरिक
ढ़ग से निकली कलश यात्रा, बकरे, मुर्गा व बतख की चढाई बली,
विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर की मंगलकामना
Kharsawan
खरसावां प्रखंड के विभिन्न गांवो में मां मंगला उषा पर्व पर पारंपरिक ढ़ग से कलश यात्रा निकली गई। जिसमें खरसावां के तलसाई, माहलीसाई, बुरूडीह, रामपुर, हरिभंजा सहित देहरूडीह गांव में जय मॉ मंगला पूजा-समिति के द्वारा में भी विधि-विधान से मां मंगला की पूजा-अर्चना की गई। साथ सुख, शांति और समृद्वि की कामना की।

पूजा के पूर्व महिलाओं ने निर्जला उपवास रखकर खरसावां के माड़वाडी तलाब में पूजा-अर्चना कर कलश में जल भरकर पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ मां मंगला की घट यात्रा (कलश यात्रा) निकली गई। इस दौरान विभिन्न्ा मांगों पर श्रद्वालुओं ने जगह-जगह रोकर पूजा-अर्चना की गई। और मां मंगला का आशिवाद लिया।

घट यात्रा लेकर देहरूडीह पूजा-स्थल पहुची और कलश की स्थापना कर पुजारी ने विशेष मंत्रोच्चारण के साथ पूजा शुरू कर दिया। पूजा-अर्चना के लिए खरसावां के मोलाडीह, बेहरासाई, कदमडीहा, देहरूडीह, कुम्हारसाही, कुचाई के जिलिंगदा सहित विभिन्न्ा गांवों से पहुचकर महिलाओं ने मां मंगला से अपने घर की सुख शांति की कामना के लिए बकरे, मुर्गा व बतख की बली दी।

गांव के पुजारी के अनुसार खरसावां के देहरूडीह गांव में 1988 से मां मंगला की पूजा-अर्चना होती आ रही है। ऐसा मान्यता है कि मां मंगला की पूजा-अर्चना के बाद ही श्रद्वालुओं के द्वारा जंगल के फल-फल का ग्रहण करते है। और मां मंगला के समक्ष मांगी हर मनोकामना पुरा होता है। इस दौरान मुख्य रूप से प्रकाश मुखी, दिनेश मुखी, रंजीत मुखी, पिनु मुखी, सुमीत शुभवम, विनित मुखी, छोटु मुखी आदि उपस्थित थे।
