नेतरहाट में सरायकेला छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुति, कलाकारों ने बिखेरा सांस्कृतिक रंग, छऊ झारखंड की न केवल आत्मा है बल्कि अध्यात्म भी है- तपन पटनायक,
Seraikella
झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नेतरहाट में सरायकेला छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड सरकार के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से विशेष सांस्कृतिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु तपन कुमार पटनायक के नेतृत्व में कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। प्रस्तुति के दौरान कुमार संभवम् पर आधारित “हर-पार्वती”, भगवान श्रीकृष्ण के शाश्वत प्रेम पर आधारित “राधा-कृष्ण”, मानव जीवन के संघर्ष को दर्शाता “धीवर (मछुआरा)” तथा देशभक्ति से ओतप्रोत “पताका” नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित गुरु तपन कुमार पटनायक ने कहा कि छऊ नृत्य झारखंड की आत्मा ही नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक पहचान भी है। उन्होंने छात्रों को सरायकेला, मानभूम, खरसावां और सिंगुवा छऊ शैली की विशेषताओं से भी अवगत कराया। प्रस्तुति में प्रसिद्ध कलाकार सह उस्ताद तरुण कुमार भोल ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं बाबूराम सरदार ने ढोल-नगाडे की थाप से माहौल को जीवंत बनाया और ठाकुर सरदार ने बांसुरी की मधुर धुनों से कार्यक्रम में संगीत का रंग भरा। इसके अलावा वरीय फैलो राजतेंदु रथ, निवारण महतो, कालीपद षाडंगी एवं कुसुमी पटनायक जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से नेतरहाट की वादियों में छऊ की सुगंध बिखेरी। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा गुरु तपन कुमार पटनायक सहित सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त उदाहरण बना, बल्कि नई पीढी को अपनी परंपराओं से जोडने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
