खरसावां मे विराट करम परब महोत्सव-2025 में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम, पारंपरिक तरीके से निकली निकली शोभायात्रा, करम डाली की पूजा अर्चना कर सुख-समृद्वि की कामना की,
Kharsawan
खरसावां तसर सेटर समीप फुटबॉल मैदान में कुडमी समाज खरसावां-कुचाई के द्वारा आयोजित विराट करम परब महोत्सव-2025 में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। कई पारंपरिक करम गीत व नृत्य से रविवार का दिन गुंजायमान रहा।

करम पूजा को लेकर सुबह से ही खरसावां के देहरूडीह के बहादुर महतो के घर विधिवत पूजा अर्चना कर दर्जन लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की थाप के साथ डहर में नृत्य प्रस्तुत करते हुए देहरीडीह से निकालकर विशाल शोभायात्रा का समापन करम पूजा स्थल टसर मैदान में की गई। इस विराट करम परब महोत्सव मे खरसावां के विभिन्न गांवों से लोग पहुचे थे। मांदर की थाप पर नाचते-गाते करम भगवान को आवहान करते हुए करम डाली की पूजा अर्चना की गई। साथ ही बहनों ने उपवास रखकर भाईयों के लिए सुख-समृद्वि की कामना की। करमा पर्व झारखंडियों की संस्कृति का प्रतीक है। करम की डाली काटने टोलियों में पहुचें युवक-युवतियों ने पहले तो करम राजा को मनाया।

इसके बाद पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर युवकों ने करम की डाली युवतियों को थमायी। इस कार्यक्रम में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के कुड़मालि विषय से पास करने वाले विद्यार्थियों को एवं समाज के विशेष प्रतिभाशाली वैसे विद्यार्थियों को समाज की ओर से पुरस्कृत किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में ओडिशा की शिखा कुमारी ने गाया -भादर मासे करम सांझे, झींगा फूल फुटलि संगे..,, जमुना के धारे बसि,बाजाई बांसुरी…, अमरदीप महतो ने गाया -भादरेक एकादसि, करम गाड़लाई राति…, मथुरा नगरे,भेंटलि नागरे…,भादो कर एकादशी करम गडाए रे…,धन्नो हमारा माई माटी ताबा लोहाय भोरा खाती…, मादर मासे एकादशी आवे ना गे बाबुक मोसी…, सुनो भाला अर्जुन ने छाडे छे तीर रूकी…, तसरो बुनों ली, छोपा छोपा फोरगो सुता काटी साडी बनाय देबो टोर गा…,जाम्बू डाली ऐसेरा, मालगाडी छुटेरा यंग दादस रांची चलेकेरा‐‐‐,आज तोरे करम राजा गांव घोरे‐‐‐,काल तोरे करम राजा कांस नही धारे‐‐‐जैसे गीत गुंजायमान रहे।

करमा की पहचान ही झारखंड की सभ्यता है-पंकज महतो
कुड़मि समाज खरसावां-कुचाई इकाई के संयोजक पंकज कुमार महतो ने कहा कि करमा पर्व झारखंड की सभ्यता और संस्कृति का परिचायक है। यह सभ्यता झारखंड की माटी से जुड़ा हुआ है। इसलिए यह पर्व प्रकृति के पर्व के रूप में मनाते हैं। उन्होने ने कहा कि करमा की पहचान ही झारखंड की सभ्यता है। इस सभ्यता व संस्कृति की भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों में पहचान होनी चाहिए। उन्होने कहा कि करमा पूजा उत्साह एवं उमंग का पर्व है, और प्राकृति एवं मानव के बीच गहरे एवं अटूट तथा अनुपम संबध को यह परिलक्षित करता है।
इन मैट्रिक व इंटरमीडिएट टॉपरो को किया सम्मानित,
विराट करम परब महोत्सव मे मैट्रिक टॉपर खरसावां के शत्रुघ्न महतो, अर्खित महतो, कुचाई के सीमा महतो, मनीषा महतो। इंटरमीडिएट टॉपर खरसावां के उषा महतो, उषा कुमारी महतो, कुचाई प्रखंड के सुमन महतो, ब्यूटी महतो को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावे कुड़मालि छात्र-छात्राओं को निशुल्क शिक्षा देने वाले शिक्षकों सुनील चंद्र महतो, त्रिलोचन महतो, तुषार कांति महतो, रामविलास महतो, दीपक महतो, गदाधर महतो और सुभाष महतो कुड़मालि शिक्षकों को समाज द्वारा सम्मानित किया गया।
ये थै मौजूद
शिक्षक गुणधाम मुतरुआर, मांगीलाल महतो, अनुप सिंहदेव, छोटराय किस्कु, महिला मोर्चा केंद्रीय सदस्य मोनिका बोयपाई, पंकज महतो, बबलू महतो रुद्र महतो, तिलक महतो, प्रकाश महतो, शिवा महतो, महेशवर महतो, दयाल महतो, दिलीप महतो, सुमित महतो, मिथुन महतो, करम आंकड़ा के अध्यक्ष श्यामलाल महतो, पंकज कुमार महतो, बाबलु महतो, रुद्र प्रताप महतो, संजय महतो, प्रकाश महतो, दयाल महतो, दिलीप महतो, अजय महतो, शिवा महतो, सदानंद महतो, महेश्वर महतो, खिरोध महतो, तिलक महतो, बहादुर महतो, जगन्नाथ महतो आदि मौजूद थे।
