स्वास्थ्य विभाग की टीम ब्रह्मानंद अस्पताल तमोलिया का किया जांच,
टीम को बड़ी मामला लगा हाथ, 45 घंटे के अंदर एक मरीज को प्रेशर नियंत्रित के लिए 36 बार जीवन रक्षक इंजेक्शन नोराड्रिड्रिलिंन दिया गया, ब्रह्मानंद अस्पताल पर लगाई जाएगी 5 लाख तक की पेनल्टी,
Seraikella
सरायकेला। शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम जब ब्रह्मानंद अस्पताल तमोलिया जांच करने पहुंची तो वहां टीम को एक बड़ी मामला हाथ लगा है। मात्र 45 घंटे के लिए भर्ती कराए गए एक मरीज के बिल में कई ऐसे दवाई और इंजेक्शन का उपयोग किया गया है जो साधारण तौर पर मरीज को केवल जीवित करने के लिए दिन में एक बार ही उपयोग किया जाना चाहिए। इसमें 45 घंटे के अंदर एक मरीज को प्रेशर नियंत्रित के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन नोराड्रिड्रिलिंन 36 बार दिया गया है। यही नहीं उल्टी रोकने के लिए उक्त मरीज को 45 घंटे के अंदर इंजेक्शन अंडास्ट्रांन का 12 पीस उपयोग किया गया है। इसके अलावा भी कई ऐसी इंजेक्शन और दवाई है जो आवश्यकता से अधिक उपयोग की गई है। बात का तब खुलासा हुआ। जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 63 वर्षीय मरीज पुनर्वासी राय और 70 वर्षीय मरीज बाली महतो का फाइनल बिल की कॉपी अस्पताल प्रबंधन से मांगी गई।

कुंदन राय नामक शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखते हुए उसके पिता पुनर्वासी राय की मौत का जिम्मेदार ब्रह्मानंद अस्पताल को ठहराया है और कुंदन राय ने अपने पत्र में लिखा है कि उसके पिता को की मौत के एक दिन बाद भी शव को वेंटिलेटर में रखा गया है और उनकी बिल बढ़ाई गई है। इस शिकायत के बाद सिविल सर्जन द्वारा चांडिल के तामोलिया स्थित ब्रह्मानंद हॉस्पिटल की जांच के लिए तीन सदस्यीय जाट समिति का गठन किया गया था। जिसमें गठित समिति में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट सरायकेला-खरसावां के नोडल पदाधिकारी डॉ अनिर्बन महतो, सदर अस्पताल सरायकेला के चिकित्सक डॉ चंदन कुमार एवं क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट सरायकेला के सहायक घनपत महतो द्वारा बीते 21 अगस्त को अस्पताल प्रबंधक राकेश कुमार एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ मुकेश कुमार की मौजूदगी में अस्पताल का स्थलीय जांच किया गया। जिसमें इलाज के दौरान हुई मौत के पहले मामले में 63 वर्षीय पुर्नवासी राय का सिर्फ फाइनल बिल का प्रतीक अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराया गया। जबकि अस्पताल में भर्ती के दौरान किए गए इलाज, जांच एवं अन्य चिकित्सीय प्रक्रिया के संबंध में किसी भी प्रकार का दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच के दौरान पाया गया कि 1 अगस्त को भर्ती हुए मरीज की मृत्यु 3 अगस्त को इलाज के दौरान हो गई थी। जिसके 45 घंटे के इलाज के दौरान मरीज को इंजेक्शन नोराड्रिड्रिलिंन का 36 पीस दी गई है। इसके अलावा भी कई ऐसे इंजेक्शन और दवाई दी गई है जो साधारण तौर पर 45 घंटे में मुश्किल से एक या दो बार दी जानी चाहिए थी । सबसे बड़ी बात है कि इस मरीज के शरीर में कहीं घाव नहीं थी परंतु बिल में ड्रेसिंग और बैंडेज का बिल दर्शाया गया है।
जांच के दौरान एक और मामला सामने आया,जिसमे इलाज के दौरान 70 वर्षीय बाली महतो की मौत हुई है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सिर्फ फाइनल बिल का प्रति उपलब्ध कराया गया। अस्पताल में भर्ती के दौरान किए गए इलाज, जांच एवं अन्य चिकित्सीय प्रक्रिया के संबंध में किसी भी प्रकार का दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती होने के बाद बाली महतो की मृत्यु इलाज के दौरान 16 अगस्त को हो गई थी। अस्पताल में कुल 126 घंटे इलाज के दौरान इसे भी कई प्रकार के इंजेक्शन और दवाई दी गई जो असाधारण हैं।
जांच दल द्वारा निष्कर्ष दिया गया है कि जांच बिंदुओं से स्पष्ट होता है कि ब्रह्मनंद नारायणा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल तामोलिया, चांडिल के द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से अत्यधिक मात्रा में दवाइयां का उपयोग किया जाता है। जिसमें आपातकालीन और जीवन रक्षक दवाइयां भी शामिल है।
सिविल सर्जन डॉक्टर सरयू प्रसाद सिंह ने कहा कि यह गंभीर विषय है इस मामले पर ब्रह्मानंद अस्पताल तमोलिया 5 लाख तक पेनल्टी लगाई जाएगी।
