खरसावां में मूसलाधार बारिश का कहर, कच्चा मकान ढहने से मासूम बच्चे की मौत, माता-पिता सहित ढाई वर्षीय बच्ची जख्मी, नहीं मिला ‘अबुआ आवास’,
Kharsawan
खरसावां में लगातार हो रही बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब यह जानलेवा साबित होने लगी है। शनिवार सुबह 4 बजे खरसावां प्रखंड के कोल शिमला गांव में भारी बारिश की वजह से एक कच्चा मकान ढह गया। इसकी वजह से मलबे में दबकर एक 5 साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई। वहीं परिवार के तीन सदस्य घायल हैं। मृत बच्चे का नाम बजाय बोदरा था। कच्चा मकान के मलबे में दबाकर मृतक के पिता मुन्ना बोदरा (25), मृतक माता अनुष्का बोदरा (24) सहित मृतक के ढाई वर्षीय बहन गुरुवारी बोदरा जख्मी हो गए। जिनका इलाज सरायकेला सदर अस्पताल में चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार खरसावां में लगातार दो दिनों से रुक रुक कर बारिश हो रही है। खरसावां के कोल शिमला निवासी मुन्ना बोदरा का परिवार अत्यंत गरीब है। मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। शुक्रवार की रात खाना खाकर पूरा परिवार कच्चे मकान में सो रहे थे। इसी क्रम में शनिवार की सुबह लगभग 4 बजे कच्चा मकान ढह गया। आसपास के ग्रामीणों ने मकान ढह जाने की आवाज सुनकर पहुंचे और देखा कि मुन्ना बोदरा का पूरा परिवार मकान के मलबे में दब गया है। ग्रामीण ने मुन्ना के बोदरा के परिवार के सभी सदस्यों को मलबे हटाकर बाहर निकल गया। और 108 एंबुलेंस बुलाकर सभी घायलों को सदर अस्पताल सरायकेला भेजा गया। जहां चिकित्सक ने 5 वर्षीय मासूम बच्चे बजाय बोदरा का मृत्यु घोषित कर दिया। जबकि घटना के बाद बेहोश होकर जख्मी पड़े मुन्ना बोदरा को होश आया। इधर उनके ढाई पुत्री गुरवारी बोदरा एवं पत्नी अनुष्का बोदरा को भी चोट लगी है।

इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लोग कह रहे हैं कि अगर वक्त पर इस परिवार को इंदिरा आवास या अबुआ आवास मिल गया होता तो ऐसा हादसा नहीं होता। घटना की सूचना पाकर खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार, एस आई प्रकाश कुमार भी पहुंचे और राहात कार्य में जुटे रहे। जबकि शिमला के ग्राम प्रधान प्रवीण प्रताप सिंहदेव व रोजगार सेवक अशोक कुमार नायक भी सहयोग करने में जुटे रहे।
इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। लोग कह रहे हैं कि अगर वक्त पर इस परिवार को इंदिरा आवास या अबुआ आवास मिल गया होता तो ऐसा हादसा नहीं होता।

सदमें में परिवार, गांव में मातम
मृतक बजाय बोदरा गांव के मुन्ना बोदरा का बेटा था और पास के सरकारी स्कूल में पढ़ाई करता था। हादसे के समय पूरा परिवार घर में ही सो रहा था। मृतक के परिवार में बताया कि सुबह 4 बजे के करीब यह हादसा हुआ। तब परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। उस वक्त भारी बारिश हो रही थी। इसी बीच उनका मकान ढह गया। परिवार के सभी सदस्य मलबे में दब गये। मकान ढहने की आवाज और शोर मचाने पर गांव के लोग पहुंचे और सभी को बाहर निकाला।

अबुआ आवास होता तो नहीं जाती जान- ग्रामीण
ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने बताया कि गांव वालों ने मिलकर सभी को मलबे से बाहर निकाला। जख्मी मुन्ना बोदरा सहित अन्य सभी जख्मी सदस्यों की अंदरूनी चोट की आशंका है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर मुन्ना बोदरा को प्रधानमंत्री आवास या ‘अबुआ आवास’ की सुविधा मिल गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती। उन्होंने बताया कि आवास के लिए कई बार आवेदन दिया गया। हर बार कहा जाता था कि प्रोसेस में है। अब सवाल है कि इसकी जवाबदेही कौन लेगा। इस हादसे से गांव के लोग सहमे हुए हैं। खास कर वैसे ग्रामीण जिनके घर मिट्टी के हैं।
आखिर क्यों नहीं मिला अबुआ आवास
इसपर, खरसावां के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी ने बताया कि दुखद घटना घटी है। उनसे पूछा गया कि आखिर इस गरीब परिवार को अबुआ आवास का लाभ क्यों नहीं मिला। जवाब में उन्होंने कहा कि मृतक के दादी को आवास का लाभ मिला है। मृतक के पिता मुन्ना बोदरा आवास योजना में नाम है कि नहीं उसकी जांच करवा रहा हूं। फिलहाल, मौजूदा हालात में बुनियादी जरुरत मुहैया कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
